आयशा आत्महत्या मामला आज देश का एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली आयशा अहमदाबाद के वातवा में रह रही थीं। पुलिस के मुताबिक, उन्होंने साबरमती नदी में कूद कर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या करने से पहले उन्होंने एक वीडियो भी बनाया था, जो भावुक कर देने वाला है। 'अगर वह मुझसे आजादी पाना चाहता है तो उसे आजादी मिलनी चाहिए। मेरी जिंदगी बस यहीं तक है। मैं खुश हूं कि मैं अल्लाह से मिलूंगी। मैं अल्लाह से दुआ करूंगी कि मुझे फिर कभी इंसानों की शक्ल नहीं देखनी पड़े', ये आयशा के आखिरी शब्द थे। ऐसे में आत्महत्या को लेकर मन में कई तरह के सवाल उठते हैं कि आखिर लोग आत्महत्या क्यों करते हैं, इसके पीछे क्या वजह होती है, क्या उन्हें आत्महत्या करने से बचाया जा सकता है, अगर हां तो कैसे? अमर उजाला से खास बातचीत में मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अमन किशोर ने इससे संबंधित कई सारी जरूरी बातें बताईं।
आयशा आत्महत्या: हंसते-मुस्कुराते चेहरे के पीछे था गंभीर डिप्रेशन, इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आयशा डिप्रेशन में थी तो उसका डिप्रेशन कितना गंभीर था, इस बारे में डॉ. अमन किशोर बताते हैं, 'निश्चित तौर पर वह (आयशा) एक डिप्रेशिव फेज (अवसादग्रस्त चरण) से गुजर रही थी और उसका डिप्रेशन गंभीर चरण में था, जिसकी वजह से उसने आत्महत्या की। आत्महत्या के विचार एकदम से नहीं आते हैं। वह कई दिनों से इसके बारे में सोच रही थी, विचार कर रही थी। ऐसी स्थिति में उनके मन में विचार आता है कि बस यही आखिरी रास्ता है, इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं है। ऐसा करने से उन्हें उनकी समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है।'
चूंकि आयशा ने आत्महत्या से पहले जो वीडियो बनाया था, उसमें वह हंसते-मुस्कुराते हुए कई चीजें बता रही थी। ऐसे में यह कैसे कहा जा सकता है कि वह डिप्रेशन में थी या आत्महत्या कर सकती है, इसपर डॉ. अमन किशोर कहते हैं, 'आप जब परेशानी में घिरे रहते हैं और जब डिप्रेशन के बहुत तीव्र चरण से गुजर रहे होते हैं और आपको कोई रास्ता नहीं मिल रहा होता है, तो वो डिप्रेशन आपके चेहरे पर साफ-साफ दिखता है, लेकिन जब आपको रास्ता मिल जाता है कि अब तो यही अंत है, अब मैं मुक्त होने वाली हूं, वो खुशी कहीं न कहीं आयशा के चेहरे पर दिख रही थी। लेकिन अगर मैं एक विशेषज्ञ की दृष्टि से देखूं तो उसकी आंखों में वो चमक नहीं थी। भले ही वह मुस्कुरा रही थी, लेकिन वो कहीं न कहीं उसका डिप्रेशिंग लुक था और बीच-बीच में वो लुक बदल भी जाता था।'
आयशा के डिप्रेशन को लेकर डॉ. अमन किशोर कहते हैं, 'जब आप उसके पिता से बात करते हुए सुनेंगे तो आपको लगेगा कि वह डिप्रेशन के सारे लक्षण बयां कर रही थी, जैसे कि- उसको अब कोई रास्ता नहीं दिख रहा है, मैं खुश कैसे रहूं जब सामने वाला खुश नहीं है। उन्होंने जब कहा कि हम आपको लेने के लिए आ रहे हैं तो वह मान तो गई, लेकिन उसने दृढ़ निश्चय कर लिया था कि उसे आत्महत्या करना ही है और उसने ऐसा किया भी। वीडियो देखकर ऐसा लग रहा था कि वो सोच रही थी मुझे अगर परिवार का सहयोग भी मिलेगा तो भी मैं इस समस्या से नहीं निकल पाऊंगी। दरअसल, ऐसे लोग बहुत निराशावादी हो जाते हैं और ऐसे में वो आत्महत्या जैसा कदम उठाकर ही दम लेते हैं। इसलिए अगर किसी का स्माइलिंग फेस रहे और वो कहे कि उसे मरना है, तो उसे कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए, ये सबसे बड़ी सीख है। कई लोग ऐसे भी होते हैं, जो कई महीनों से प्लानिंग करते रहते हैं, जो बाद में यह दृढ़ निश्चय कर लेते हैं कि मुझे आत्महत्या करनी ही है।'
कोई व्यक्ति आत्महत्या कर सकता है, ऐसे लोगों की पहचान कैसे कर सकते हैं? इस सवाल के जवाब में डॉ. अमन किशोर कहते हैं, 'जब हम आत्महत्या की बात करते हैं तो लगभग 80 फीसदी मामलों में डिप्रेशन (अवसाद) रहता ही है। इसके अलावा करीब 20 फीसदी जो होते हैं, वो आवेगी कदम (impulsive steps) होते हैं, जैसे कि अभी झगड़ा हुआ और उसी समय जाकर आत्महत्या कर ली। ऐसे लोगों को तो बचाना मुश्किल होता है, लेकिन अगर कोई लंबे समय से अवसाद में है, तो उसे उसकी समस्याओं से उबारकर उसे बचाया जा सकता है, क्योंकि हम अवसाद के आधार पर उसकी पहचान कर सकते हैं।'