आर्टिफिशियल स्वीटनर शब्द इन दिनों काफी चर्चा में है। इसे चीनी के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है।
Artificial Sweetener: चीनी जगह आर्टिफिशियल स्वीटनर का करते हैं इस्तेमाल? जानिए ये सेहत के लिए ठीक है या नहीं
आर्टिफिशियल स्वीटनर (कृत्रिम मिठास वाली चीज) को खाद्य पदार्थों में उनकी चीनी की मात्रा कम करने और उनके स्वाद को बेहतर बनाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। हालांकि बढ़ते शोध से पता चलता है कि इस तरह के स्वीटनर भी सेहत के लिए अच्छे हों ये जरूरी नहीं है।
आर्टिफिशियल स्वीटनर किस तरह से काम करते हैं?
आर्टिफिशियल स्वीटनर (कृत्रिम मिठास) को खाद्य पदार्थों में उनकी चीनी की मात्रा कम करने और स्वाद को बेहतर बनाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। हालांकि बढ़ते शोध से पता चलता है कि इस तरह के स्वीटनर भी सेहत के लिए अच्छे हों ये जरूरी नहीं है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आर्टिफिशियल स्वीटनर मुख्य रूप से रसायनों के रूप में विकसित किए गए थे जो हमारे जीभ पर मौजूद स्वीट टेस्ट सेंस को उत्तेजित करते हैं। ये दिमाग को एक सिग्नल भेजते हैं जिससे शरीर को लगता है कि आपने हाई कार्बोहाइड्रेट वाली चीज खाई है। इस सिग्नल के जवाब में हमारा शरीर इसे उर्जा के रूप में ब्रेक डाउन करने लगता है।
इस शोध के दौरान हाइपोथैलेमस में रक्त प्रवाह को मापा गया, जो हमारे मस्तिष्क का वह हिस्सा है जो भूख नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है। विशेषज्ञों ने पाया कि सुक्रोज वाली चीजें खाने से मस्तिष्क का ये क्षेत्र एक्टिव हो जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर भी उन न्यूरॉन्स को उत्तेजित करता है जो भूख को बढ़ा देते हैं। समय के साथ, इससे हमारी भूख बढ़ती जाती है- जिसका अर्थ है कि हम अधिक खाने लगते हैं और इससे वजन बढ़ने का खतरा हो सकता है।
बढ़ सकता है मोटापे का खतरा
शोधकर्ताओं ने पाया कि आर्टिफिशियल स्वीटनर का सेवन करने से भी हमें अधिक भूख लगती है, जो अंततः हमें अधिक कैलोरी का सेवन करने के लिए प्रेरित कर सकती है।
अध्ययन में पाया गया कि जो लोग नियमित रूप से अधिक मात्रा में इस तरह के स्वीटनर का सेवन करते हैं, उनमें मोटापे की आशंका उन लोगों की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत अधिक होती है, जो कम मात्रा में इसका इस्तेमाल करते हैं।
आर्टिफिशियल स्वीटनर स्वस्थ विकल्प हैं या नहीं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आर्टिफिशियल स्वीटनर के इस्तेमाल के पीछे की वजह चीनी और इसके साइड-इफेक्ट्स को कम करना है, पर जिस तरह के अध्ययन के रिपोर्ट हैं उससे पता चलता है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर को भी स्वस्थ विकल्प नहीं माना जा सकता है।
आर्टिफिशियल स्वीटनर का स्वास्थ्य पर कई प्रकार से नकारात्मक प्रभाव हो सकता है, लेकिन क्या ये हमारे लिए चीनी जितना ही हानिकारक हैं? विशेषज्ञ कहते हैं, चीनी की तुलना में इसे थोड़ा बेहतर माना जा सकता है पर हमें और विस्तृत शोध की आवश्यकता है। फिलहाल चीनी को अधिक नुकसानदायक माना जाता है।
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स्रोत और संदर्भ
Non-caloric sweetener effects on brain appetite regulation in individuals across varying body weights
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