गठिया की समस्या कुछ दशकों पहले तक उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी बनी हुई थी, हालांकि अब कम उम्र के लोग भी इसका शिकार होते जा रहे हैं। गठिया जिसे आर्थराइटिस भी कहा जाता है, इसके कारण जोड़ों में सूजन, दर्द, अकड़न की दिक्कत होने लगती है। यह शरीर के किसी भी जोड़ को प्रभावित कर सकता है, लेकिन हाथों, घुटनों, कूल्हों और पैरों में इसका जोखिम सबसे आम है।
Arthritis: 20 से कम उम्र के लोग भी हो रहे गठिया का शिकार, आपका भी यूरिक एसिड हाई तो नहीं? बरतें ये सावधानियां
गठिया से बचाव के लिए स्वस्थ दिनचर्या अपनाना, वजन नियंत्रित रखना, संतुलित आहार लेना, सिगरेट-शराब से परहेज करना, पर्याप्त मात्रा में पानी व अन्य तरल पदार्थ का सेवन करना और नियमित रूप से कसरत करना बेहद मददगार साबित हो सकता है।
गठिया को समझना जरूरी
गठिया ‘क्रिस्टल आर्थ्रोपेथी’ समूह का एक रोग है, जो जोड़ों और मुलायम ऊतकों में ‘क्रिस्टल’ जमने के कारण होता है। गठिया तब विकसित होता है, जब खून में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है और यह जोड़ों में पहुंचकर सुई-नुमा ‘क्रिस्टल’ का रूप ले लेता है, जिससे दर्द और सूजन की दिक्कत बढ़ जाती है।
गठिया के शिकार मरीज अक्सर इसे गंभीर दर्द के रूप में वर्णित करते हैं। यह आमतौर पर पैर के अंगूठे से शुरू होता है और इसमें त्वचा पर हल्का-सा स्पर्श भी अक्सर असहनीय लगता है।
गठिया की समस्या और इसके लक्षण
गठिया का निदान असहनीय दर्द, प्रभावित जोड़ों में और उनके आसपास सूजन तथा लालिमा जैसे आम लक्षणों पर आधारित है। सूजे हुए जोड़ से लिए गए तरल पदार्थ की माइक्रोस्कोप से जांच किए जाने के दौरान ‘क्रिस्टल’ दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा, रक्त परीक्षण में आमतौर पर यूरिक एसिड का स्तर बढ़ा हुआ मिलता है।
गठिया से बचाव के लिए स्वस्थ दिनचर्या अपनाना, वजन नियंत्रित रखना, संतुलित आहार लेना, सिगरेट-शराब से परहेज करना, पर्याप्त मात्रा में पानी व अन्य तरल पदार्थ का सेवन करना और नियमित रूप से कसरत करना बेहद मददगार साबित हो सकता है।
यूरिक एसिड बढ़ने की वजह
यूरिक एसिड का स्तर आमतौर पर शराब के अत्यधिक सेवन, मोटापे, डायबिटीज और उच्च रक्तचाप के कारण बढ़ता है। प्यूरीन युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन को भी यूरिक एसिड के स्तर में वृद्धि के लिए जिम्मेदार माना जाता है। प्यूरीन उन यौगिकों को कहते हैं, जिनमें यूरिक एसिड पाया जाता है। इससे युक्त खाद्य पदार्थों में मांस, कलेजी, मैकेरल और एंकोवी जैसी तैलीय मछलियां तथा मार्माइट और बीयर जैसे खमीरयुक्त पदार्थ शामिल हैं।
जिन लोगों में यूरिक एसिड का स्तर अधिक बढ़ा रहता है, उनमें गठिया बढ़ने का खतरा अधिक हो सकता है।
इलाज में कारगर दवाएं उपलब्ध
खानपान में बदलाव मात्र से गठिया के लक्षणों से राहत पाना संभव नहीं है। दवाओं के जरिए गठिया के दर्द को उभरने और बीमारी को अधिक गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है। जोड़ों में सूजन होने पर आबुप्रोफेन, नेप्रोक्सन या स्टेरॉयड जैसी सूजन-रोधी दवाएं दी जाती हैं। सूजन खत्म होने के बाद भविष्य में गठिया के दर्द और सूजन को उभरने से रोकना महत्वपूर्ण है। अगर आपको कम उम्र से ही अक्सर घुटनों में दर्द-सूजन की दिकक्त बनी रहती है तो इस बारे में डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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