आमतौर पर माना जाता है कि रैबीज कुत्ते के काटने से होता है मगर ऐसा नहीं है। इस बीमारी का वायरस कुत्ते, बिल्ली, बंदर समेत कई जानवरों के काटने से शरीर में फैलते हैं। इसके साथ ही कई बार पालतू जानवरों के चाटने या व्यक्ति के खून का लार से संपर्क में आने के कारण भी ये रोग फैलता है। आइए जानते हैं किस तरह रैबीज व्यक्ति को कैसे प्रभावित करता है और उसके लक्षण व उपचार क्या हैं।
जानिए किस तरह रैबीज से कर सकते हैं बचाव, सही समय पर नहीं हुआ इलाज तो जा सकती है जान
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कैसे प्रभावित करता है रैबीज
रैबीज एक तरह का वायरल संक्रमण है जो आमतौर पर संक्रमित जानवरों के काटने से फैलता है। रैबीज का वायरस खतरनाक होता है। अगर सही समय पर इसका इलाज न किया जाए तो ज्यादातर खतरनाक साबित हो सकता है। रैबीज व्यक्ति के शरीर को दो तरह से प्रभावित करता है। जब रैबीज वायरस व्यक्ति के नर्वस सिस्टम में पहुंच जाते हैं और उसके बाद मस्तिष्क तक पहुंच जाए। रैबीज वायरस जब व्यक्ति के नर्वस सिस्टम में पहुंच जाता है तो इससे दिमाग में सूजन पैदा हो जाता है। जिससे व्यक्ति जल्द ही कोमा में चला जाता है या उसकी मौत हो जाती है। कभी-कभी उसे पानी से भी डर लगता है। इसके अलावा कुछ लोगों को लकवा भी हो सकता है।
कैसे फैलता है रैबीज
रैबीज लार से फैलने वाला बीमारी है। संक्रिमत जानवर के लार का संपर्क जब व्यक्ति के खून से होता है तो ये वायरस फैलता है। मनुष्य के खून में ये वायरस कभी जानवर के काटने से पहुंचते हैं या पालतू जानवरों द्वारा घाव और चोट आदि के चाटने से फैलते हैं।
रैबीज के लक्षण
रैबीज वायरस से ग्रसित व्यक्ति में इसके लक्षण बहुत दिनों बाद उभरकर आते हैं। रैबीज से संक्रमित व्यक्ति में कई लक्षण दिखते हैं। जैसे कि बुखार आना, सिरदर्द होना, घबराहट या बेचैनी होना, चिंता और व्याकुलता रहना, भ्रम की स्थिति में रहना, खाना निगलने में मुश्किल होना, बहुत अधिक लार निकलना। ये सारे लक्षण रैबीज के हैं। इसके अलावा पानी से डर लगना, पागलपन के लक्षण व अनिद्रा की समस्या रैबीज के लक्षण हो सकते हैं।
क्या करें अगर कोई जानवर काट ले
जिस जगह पर आपको जानवर ने काटा हो उस स्थान को तुरंत पानी से धोएं व साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए। जानवर के काटने के तुरंत बाद रोगी के टिटनेस का इंजेक्शन लगवाना चाहिए। और डॉक्टर की परामर्श से काटे गए स्थान का सही इलाज कराना चाहिए।