हृदय रोगों के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को इस रोग का शिकार पाया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा रहता है जिसे हृदय रोगों का प्रमुख कारण माना जाता रहा है। इसके अलावा जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को हार्ट की समस्या रही हो उन लोगों में भी हृदय संबंधित बीमारियां हो सकती हैं जिसको लेकर सभी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
जानना जरूरी: ब्लड प्रेशर-कोलेस्ट्रॉल ही नहीं इन वजहों से भी हो सकते हैं हार्ट अटैक का शिकार, हो जाइए सावधान
क्या आप जानते हैं कि लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के अलावा भी कई स्थितियां हो सकती हैं जिसके कारण हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और भविष्य में गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है? आइए इस स्थितियों के बारे में जानते हैं।
हृदय संबंधित रोगों का बढ़ता खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक हृदय संबंधी रोगों के कारण वैश्विक स्वास्थ्य पर दबाव बढ़ता जा रहा है। हृदय रोगों के कारण होने वाली मौतों में से 60-70 फीसदी के लिए हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट जिम्मेदार है। एक अन्य रिपोर्ट से पता चलता है कि डब्ल्यूएचओ के यूरोपीय क्षेत्र में हृदय रोगों के लिए हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर) मुख्य कारक है। यहां किए गए अध्ययनों में पाया गया है कि 30-79 वर्ष की आयु के लगभग तीन में से एक व्यक्ति को हाइपरटेंशन की दिक्कत है, जिसके कारण हार्ट अटैक होने का खतरा बढ़ जाता है।
आइए उन परिस्थितियों के बारे में जानते हैं जिनपर ध्यान न देना भी हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।
वायु प्रदूषण है खतरनाक
जिन पर्यावरणीय कारकों के कारण हार्ट अटैक हो सकता है उनमें वायु प्रदूषण को प्रमुख माना जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि वायु प्रदूषण के अधिक संपर्क में रहने वाले लोगों में दिल का दौरा पड़ने की आशंका अधिक होती है। अगर आप नियमित रूप से दूषित हवा में सांस लेते हैं, अक्सर कार-वाहनों से निकलने वाले धुएं के संपर्क में रहते हैं तो इससे धमनियों के बंद होने और हृदय रोग होने की आशंका बढ़ जाती है।
प्रदूषित हवा में उपस्थित छोटे कण, जिन्हें पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) कहा जाता है वे सांस के माध्यम से फेफड़ों और हार्ट में पहुंचकर कोशिकाओं को गंभीर क्षति पहुंचाने लगते हैं जिसके कारण हार्ट अटैक होने का जोखिम बढ़ जाता है।
ज्यादा गुस्सा आता है तो हो जाइए सावधान
क्रोध, दुःख और तनाव जैसी भावनाएं भी दीर्घकालिक रूप में हृदय संबंधी समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती हैं, जिसको लेकर भी सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है।
कई बार सरप्राइज पार्टी, बहुत अधिक खुशी-गम के कारण भी हृदय की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। क्रोध की स्थिति स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल में वृद्धि का कारण बनती है जिससे हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है। क्रोध की भावना परिसंचरण तंत्र के सामान्य कामकाज को बाधित कर सकती है, जिससे हृदय पर दबाव पड़ता है।
आपको सांस की दिक्कत तो नहीं?
अगर आपको फेफड़ों की बीमारी जैसे अस्थमा-ब्रोंकाइटिस है तो इसके कारण आपमें दिल का दौरा पड़ने की आशंका लगभग 70% बढ़ जाती है। भले ही आप इसे नियंत्रित रखने के लिए इनहेलर का इस्तेमाल करते हों, फिर भी आपका जोखिम सामान्य से ज्यादा हो सकता है।
अस्थमा वायुमार्ग में दीर्घकालिक सूजन उत्पन्न करके हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा देती है। समय के साथ धमनियों में प्लाक बनने लगता है (एथेरोस्क्लेरोसिस) जो रक्त वाहिकाओं को क्षति पहुंचाती है। सांस की समस्या के शिकार लोगों को अधिक सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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