बदलते मौसम में सभी लोग सर्दी-जुकाम का शिकार होते हैं। लेकिन अक्सर ऐसा होना हानिकारक हो सकता है क्योंकि ये साइनस के लक्षण हैं। साइनस की शुरुआत एलर्जी और सर्दी-जुकाम से ही होती है। बार-बार जुकाम होने से नाक, गाल और भौहों की हड्डी की वायु कोशिकाओं में सूजन आ जाती है।
बार-बार होने वाला सर्दी-जुकाम है हानिकारक, हो सकते हैं साइनस के शिकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बार-बार सर्दी-जुकाम, छींक आना और गाला खराब होने पर इलाज नहीं कराया जाता तो ये एडेनोइडाइटिस, साइनस और टॉन्सिल की समस्या में बदल सकती हैं। अक्सर ज्यादा एमजी वाली दवाओं का सेवन करने से बीमारियां ठीक होने की बजाय दब जाती हैं और आगे चलकर ब्रॉन्काइटिस और दमा जैसी गंभीर बीमारियों का रूप ले लेती हैं।
- संक्रमण, एलर्जी और केमिकल इर्रिटेशन की वजह से साइनस हो सकता है
- चेहरे पर नरमी
- साइनस के कारण कान और दातों में दर्द
- बुखार
- नाक से सांस लेने में तकलीफ
- गले में खराश
- चेहरे पर सूजन
अगर आप बार-बार छीकें आने वाली एलर्जी यानी राइनाइटिस से पीड़ित हैं, तो भी आपको तीव्र साइनस हो सकता है। नमी, ठंडी हवा, शराब और इत्र के कारण साइनस बढ़ सकता है। इसके अलावा अगर आपको दमा है तो भी यह साइनस में बदल सकता है। सामान्य ज़ुकाम के दौरान होने वाली बंद नाक और साइनस में होने वाली नाक की जकड़न दोनों बीमारियां को अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं जो हानिकारक हो सकता है।
- तरल पदार्थ और आर्द्रीकरण, कफ को पतला करने और आपके साइनस को खत्म करने में मदद करते हैं। ये साइनस को चिकनाई देते हैं और आपकी त्वचा को हाइड्रेट रखते हैं।
- भाप बलगम को ढीला करके जमाव से राहत दिलाने में मदद करता है। एक कटोरी गर्म पानी और एक बड़े तौलिया का उपयोग करके भाप ले सकते हैं।