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Sensorineural Hearing Loss: ये एक गलती आपको भी बना सकती है बहरा, डॉक्टर की सलाह तुरंत कर लें इसमें सुधार

Thu, 20 Jun 2024 02:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 20 Jun 2024 02:10 PM IST
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alka yagnik Sensorineural Hearing Loss Loud noise can cause permanent hearing damage
बहरेपन और सुनाई न देने की समस्या - फोटो : Freepik

मशहूर गायिका अलका याग्निक ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से बताया कि उनके सुनने की क्षमता कम हो गई है। उनमें दुर्लभ सेंसोरिन्यूरल हियरिंग लॉस नामक समस्या का निदान किया गया है। पोस्ट में गायिका ने बताया कि उन्हें ये समस्या वायरल संक्रमण के कारण हुई जिसके कारण अब कम सुनाई देता है। 



सेंसोरिन्यूरल हियरिंग लॉस (एसएनएचएल) अक्सर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया का एक स्वाभाविक हिस्सा माना जाता रहा है। हालांकि जीवनशैली और कुछ पर्यावरणीय स्थितियों के कारण आप कम उम्र में भी इसके शिकार हो सकते हैं। आंतरिक कान या श्रवण तंत्रिका की संरचनाओं में होने वाली क्षति की इस समस्या का जोखिम किसी को भी हो सकता है।

डॉक्टर कहते हैं, कान काफी संवेदनशील अंग हैं जिनको लेकर आपको विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है, हालांकि युवाओं में बढ़ती एक गड़बड़ आदत ने इसका खतरा काफी बढ़ा दिया है। आइए जानते हैं कि कम सुनाई देने की ये समस्या क्यों होती है और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है?

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अल्का याग्निक की सुनाई देने की क्षमता खोई - फोटो : instagram

पहले समझिए क्या है सेंसोरिन्यूरल हियरिंग लॉस?

हमारा कान कई प्रकार की संवेदनशील तंत्रिकाओं से घिरा होता है। इनमें होने वाली किसी भी प्रकार की समस्या न सिर्फ सुनने की क्षमता को बाधित कर देती है साथ ही इससे शारीरिक संतुलन में समस्या सहित कई और भी दिक्कतें हो सकती हैं। 

उम्र बढ़ने के साथ कानों में कुछ प्रकार के संक्रमण, आनुवंशिक कारक सहित तेज आवाज के अधिक संपर्क में रहने के कारण आपकी सुनने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। कम उम्र में बढ़ती इस समस्या के लिए मुख्यरूप से ईयरफोन-हेडफोन से तेज आवाज में संगीत सुनने को प्रमुख कारक माना जाता है।

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ईयरफोन का ज्यादा इस्तेमाल हानिकारक - फोटो : Freepik.com

तेज आवाज से कानों को होता है नुकसान

हमारे आंतरिक कान के अंदर स्टीरियोसिलिया नामक हिस्सा होता है जिसमें छोटे-छोटे बाल होते हैं। यही बाल ध्वनि तरंगों से कंपन को तंत्रिका संकेतों में परिवर्तित करते हैं जिन्हें आपकी श्रवण तंत्रिकाएं मस्तिष्क तक ले जाती है। आमतौर पर हमारे कानों की क्षमता कुछ घंटे तक 70-75 डेसिबल की आवाज सहन करने की होती है। वहीं जब आप 85 डेसिबल से अधिक तेज आवाज के संपर्क में आते हैं तो इन बालों को नुकसान हो सकता है जिससे एसएनएचएल का जोखिम बढ़ जाता है।

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इयरफोन से कानों को नुकसान - फोटो : Freepik.com

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में पुणे स्थित ईएनटी विशेषज्ञ डॉ जाकिर.एम.खान बताते हैं, ईयरफोन का लंबे समय तक इस्तेमाल कानों के लिए हानिकारक है। वहीं अगर आप ऐसे हेडफोन-ईयरफोन्स का इस्तेमाल करते हैं जिससे कान पूरी तरह से कवर रहते हैं तो इससे कान में बाहरी हवा नहीं जा पाती है। रबर वाले इयरफोन प्लग के कानों में लगाने से संक्रमण का जोखिम रहता है।

कानों को स्वस्थ और सुरक्षित रखने के लिए सबसे जरूरी है कि कानों को पूरी तरह से कवर करने वाले या तेज आवाज वाले इस तरह के उपकरणों के इस्तेमाल से बचा जाए।

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बहरेपन का खतरा - फोटो : Freepik

हो सकता है बहरापन

कुछ स्थितियों में एसएनएचएल तीन दिनों के भीतर भी विकसित हो सकता है। एक लाख लोगों में से लगभग 5 से 20 लोगों को इस तरह के एसएनएचएल की समस्या हो सकती है। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो एसएनएचएल तुरंत या कुछ दिनों में बहरेपन का भी कारण बन सकता है। यह अक्सर केवल एक कान को प्रभावित करता है और कई लोग सुबह उठने के बाद सबसे पहले इसे नोटिस करते हैं।

ईयरफोन्स के इस्तेमाल के अलावा सिर में चोट लगने, ऑटोइम्यूम रोग, मेनिएर्स रोग, कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव के साथ रक्त संचार संबंधी समस्याएं भी एसएनएचएल का कारण बन सकती हैं। 


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स्रोत और संदर्भ
Yoga and its effect on sperm genomic integrity, gene expression, telomere length and perceived quality of life in early pregnancy loss

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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