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Latest Study: मिली बड़ी कामयाबी- कहीं आपके आस-पास कोरोनावायरस तो नहीं? बस पांच मिनट में चल जाएगा पता

Tue, 11 Jul 2023 12:27 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 11 Jul 2023 12:27 PM IST
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air monitor can detect COVID-19 in a room within 5 minutes, Real-time environmental surveillance of SARS-CoV-2
कोरोना का आसानी से चल सकेगा पता - फोटो : Istock

कोरोनावायरस वैश्विक स्वास्थ्य चिंता का कारण रहा है। भले ही इन दिनों संक्रमण की रफ्तार काफी नियंत्रित है पर वैज्ञानिकों की टीम ने चेताया है कि इसे हल्के में लेने की गलती नहीं की जानी चाहिए। वायरस में अब भी म्यूटेशन जारी है जिससे नए वैरिएंट्स का खतरा अब भी बना हुआ है। पिछले महीने अमेरिका के कुछ स्टेट्स में एक नए ओमिक्रॉन वैरिएंट EU.1.1 के बारे में पता चला था।



विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीनेशन और शरीर में बनी रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण संक्रमण की रफ्तार काफी कम हुई है और अब कई देशों में यह एंडेमिक स्टेज में पहुंच गया है।

भविष्य में कोरोना से और बेहतर सुरक्षा कैसे पाई जा सकती है, इस बारे में शोध कर रही वैज्ञानिकों की एक टीम को बड़ी कामयाबी मिली है। वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक एयर-मॉनिटरिंग डिवाइस तैयार किया है जो 5 मिनट के भीतर संक्रमित व्यक्ति वाले कमरे में कोविड-19 का पता लगा सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने और लोगों को सुरक्षित करने में विशेष लाभ मिल सकेगा। 

air monitor can detect COVID-19 in a room within 5 minutes, Real-time environmental surveillance of SARS-CoV-2
कोरोना का लग सकेगा पता - फोटो : istock

एयर मॉनिटर देगी वायरस की जानकारी

नेचर कम्युनिकेशंस ने जर्नल में सोमवार को प्रकाशित इस शोध के परिणाम काफी आशाजनक रहे हैं।  शोधकर्ता और एसोसिएट इंजीनियरिंग के प्रोफेसर राजन चक्रवर्ती कहते हैं, हमारी टीम यह जानने के लिए अध्ययन कर रही थी कि किसी बंद कमरे में क्या कोरोना का पता लगाया जा सकता है? यह किसी स्थान की सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है, भले ही ये भूसे के ढेर में सुई ढूंढने जैसा हो।

इस एयर मॉनिटर की मदद से ऐसा करने में सफलता मिल सकती है। अब हम ये जान सकते हैं कि किसी स्थान पर वायरस है या नहीं?

air monitor can detect COVID-19 in a room within 5 minutes, Real-time environmental surveillance of SARS-CoV-2
कोविड-19 का लग सकेगा पता - फोटो : pixabay

पांच मिनट में लग सकेगा वायरस का पता

टीम ने वेट साइक्लोन नामक तकनीक का उपयोग करके 176 क्यूबिक फीट हवा में 5 मिनट के भीतर वायरस का पता लगाया। वायरस का पता चलने पर डिवाइस की लाइट हरे से लाल हो जाती है, जो इंगित करती है कि इस हवा में वायरस है और यहां अधिक वेंटिलेशन की व्यवस्था की जानी चाहिए। 

टीम ने प्रयोगशाला प्रयोगों के दौरान एक कमरे में कोविड-19 पॉजिटिव दो लोगों को इस डिवाइस के साथ बंद कर दिया और यह जानने की कोशिश की कि कितनी तेजी से वायरस कमरे में फैल सकता है और यह डिवाइस कितनी जल्दी इसका पता लगा सकती है। इसके बेहतर परिणाम देखे गए। 

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air monitor can detect COVID-19 in a room within 5 minutes, Real-time environmental surveillance of SARS-CoV-2
कोरोना का कैसे लगाएं पता - फोटो : Pixabay

कोरोना के अलावा भी अन्य श्वसन वायरस की हो सकेगी पहचान

वैज्ञानिकों की टीम इस शोध के अगले चरण में इस लक्ष्य के साथ काम कर रही है कि इस डिवाइस को किस प्रकार से घरेलू इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया जा सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस उपकरण के अस्पतालों और स्कूलों में प्रयोग करने से हम बड़ी संख्या में लोगों को संक्रमण के खतरे से बचा सकेंगे। खास बात यह है कि ये डिवाइस न सिर्फ कोरोनावायरस, बल्कि इन्फ्लूएंजा और अन्य रेस्पोरेटरी सिंकाइटियल वायरस का पता लगाने में भी सक्षम है।

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air monitor can detect COVID-19 in a room within 5 minutes, Real-time environmental surveillance of SARS-CoV-2
कोरोना का पता लगाना होगा आसान - फोटो : PTI

क्या कहते हैं शोधकर्ता?

वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में न्यूरोलॉजी के प्रोफेसर जॉन सिरिटो कहते हैं, अब तक हमारे पास ऐसा कुछ भी नहीं था जो हमें बताता हो कि कमरा कितना सुरक्षित है? यदि आप 100 लोगों वाले कमरे में हैं, तो जब तक कोई व्यक्ति संक्रमित नहीं होता था तब तक इसका अंदाजा लगाना कठिन था। इस उपकरण के साथ आप रियल टाइम में या हर 5 मिनट में जान सकते हैं कि हवा में कोई  वायरस है या नहीं? यह श्वसन संबंधी संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए भी काफी कारगर साबित हो सकता है। 


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स्रोत और संदर्भ
Real-time environmental surveillance of SARS-CoV-2 aerosols

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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