लिवर से संबंधित कई तरह की बीमारियां वैश्विक स्वास्थ्य के लिए बड़ा जोखिम रही हैं। लिवर में फैट बनने यानी फैटी लिवर की समस्या का खतरा कम उम्र के लोगों में भी देखा जा रहा है। पहले ये बीमारी ज्यादातर शराब पीने वालों में देखी जाती थी, लेकिन अब नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज भी भारत में तेजी से पैर पसार रही है। ये उन लोगों में भी देखा जा रहा है जो शराब को हाथ तक नहीं लगाते।
Liver Disease: 35% से ज्यादा भारतीय लिवर की इस बीमारी का शिकार, डॉक्टरों ने इन तीन आदतों को माना सबसे खतरनाक
- अध्ययनों के अनुसार, भारत की लगभग 38% आबादी किसी न किसी स्तर पर फैटी लिवर से प्रभावित है और चौंकाने वाली बात ये है कि ज्यादातर लोगों को इस बीमारी का पता ही नहीं होता।
भारतीय आबादी में बढ़ता खतरा
जुलाई 2024 में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ जीतेंद्र सिंह ने एक कार्यक्रम में बताया कि देश में हर तीसरे व्यक्ति को फैटी लिवर डिजीज हो सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कई कारण हैं जो लिवर में फैट की मात्रा बढ़ाने वाले हो सकते हैं। हाई कैलोरी वाली चीजें खाने से जोखिम बढ़ सकती है। जब हमारा लिवर, फैट वाली चीजों को सामान्य रूप से संसाधित और विघटित नहीं कर पाता है तो इसके कारण फैट जमने का खतरा हो सकता है। मोटापा, मधुमेह या हाई ट्राइग्लिसराइड्स जैसी कुछ अन्य स्थितियों से पीड़ित लोगों में भी फैटी लिवर विकसित होने की आशंका अधिक होती है। लिवर में फैट जमने का खतरा उन लोगों में भी देखा जाता रहा है जो शराब नहीं पीते हैं।
आइए जानते हैं कि दिनचर्या की किन आदतों के कारण आप फैटी लिवर रोग के शिकार हो सकते हैं? जिनमें सुधार करना बहुत जरूरी है।
शराब का सेवन नुकसानदायक
लिवर के लिए जिन चीजों को सबसे हानिकारक माना जाता है, शराब पीने की आदत उसमें प्रमुख है। अत्यधिक शराब के सेवन से न सिर्फ फैटी लिवर की समस्या होती है बल्कि इससे लिवर फेलियर तक का भी जोखिम रहता है। फैटी लीवर रोग से पीड़ित लोगों को शराब का सेवन बिल्कुल न करने की सलाह दी जाती है। हालांकि शराब न पीने वालों में भी फैटी लिवर की समस्या होने का खतरा रहता है। इसलिए लाइफस्टाइल में सुधार करना भी आवश्यक है।
शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना खतरनाक
नियमित व्यायाम सभी के लिए महत्वपूर्ण है। व्यायाम की कमी फैटी लिवर रोग के खतरे को तो बढ़ाती ही है साथ ही इससे शारीरिक और मानसिक कई प्रकार की समस्याओं का खतरा भी हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया शारीरिक रूप से सक्रिय रहने से न सिर्फ फैटी लिवर के प्रबंधन में मदद मिलती है साथ ही जिन लोगों को ये समस्या नहीं है उनमें ये जोखिमों को भी कम करती है। एनएएफएलडी की समस्या वाले लोगों को सप्ताह में कम से कम 150-300 मिनट के मध्यम एरोबिक व्यायाम करने की सलाह दी जाती है।
कम कर दें चीनी का सेवन
अध्ययनकर्ताओं ने बताया, फैटी लिवर रोग विशेष रूप से नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) के लिए अधिक मात्रा में चीनी के सेवन को जिम्मेदार माना जाता है। ये आदत ब्लड शुगर के स्तर को काफी बढ़ा देती है जिससे लिवर में वसा की मात्रा बढ़ने लगती है। कैंडी, आइसक्रीम और मीठे पेय भी आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। ज्यादा चीनी का सेवन करते हैं तो सावधान हो जाइए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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