शादियों का सीजन आते ही घर पर कम से कम 5-6 वेडिंग कार्ड इकट्ठा हो जाते हैं। वहीं धूमधाम से निकलती बारात के आगे जोर-शोर से आतिशबाजी होती है। शादी के आयोजन में प्लास्टिक की प्लेट्स और डिस्पोजल ग्लास आदि का भरपूर उपयोग होता है। शादी को भव्य बनाने के चक्कर में पर्यावरण को काफी नुकसान भी होता है। हालांकि परिवार में शादी के तौर पर आने वाली खुशियों के बीच पर्यावरण पर ध्यान न दे पाना सामान्य है।
भारत में शादियां हमेशा से एक भव्य और शानदार आयोजन रहा है जो कि परंपराओं, रीति रिवाजों और रंगीन उत्सवों का मिश्रण होती हैं। लेकिन बदलते समय में अब शादियों में भी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। वर्तमान में भारतीय शादियों में ईको फ्रेंडली बदलाव आ रहे हैं। ईको फ्रेंडली शादियां केवल चलन नहीं बल्कि जरूरत बन रही हैं। पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता और संसाधनों के संरक्षण की भावना के चलते लोग शादी के आयोजन में पर्यावरण सुरक्षा पर ध्यान दे रहे हैं।
कई सेलेब्स इसकी मिसाल बन गए, जिन्होंने ईको फ्रेंडली शादी को प्रोत्साहित करते हुए समाज को एक संदेश दिया। आम लोगों ने भी पर्यावरण संरक्षण की जरूरत को समझना शुरू कर दिया और वह भी ईको फ्रेंडली शादी खुशी-खुशी कर रहे हैं।
ईको फ्रेंडली शादी में परंपराओं या रीति-रिवाजों में कोई बदलाव नहीं होता, बल्कि कुछ छोटे-छोटे तरीके अपनाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रय़ास किया जाता है। ईको फ्रेंडली शादी में वेडिंग कार्ड से लेकर तोहफे और आतिशबाजी तक में बदलाव आए हैं। आइए जानते हैं कि कैसे शादी को ईको फ्रेंडली बनाया जा सकता है और वक्त के साथ शादी को ईको फ्रेंडली बनाने में क्या बदलाव हुए हैं।
2 of 5
शादी का कार्ड
- फोटो : instagram
शादी कार्ड का बदलाव
पहले शादी के निमंत्रण कार्डों में भारी संख्या में कागज और सजावट का उपयोग किया जाता था, जो पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालते थे। लेकिन अब कई लोग डिजिटल कार्ड को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऑनलाइन निमंत्रण, ईमेल और सोशल मीडिया के जरिए शादियों के निमंत्रण भेजना न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह समय और पैसे की भी बचत करता है। इसके अलावा, कई लोग रिसायकल कागज पर शादी का कार्ड छपवा रहे हैं जो कि पर्यावरण के लिए कम हानिकारक होते हैं। डिजिटल कार्ड का चलन कोविड काल के दौरान अधिक बढ़ गया था, जो अब आम लोगों की भी पसंद बन गया है।
3 of 5
शादियों में बदलता चलन
- फोटो : instagram
पारंपरिक उपहारों का बदलता स्वरूप
शादी के दौरान तोहफे, नेक या शगुन आशीर्वाद स्वरूप दिया जाता है। शादियों में उपहारों का काफी महत्व होता है लेकिन अब उपहारों के चयन में भी पर्यावरण का ख्याल रखा जाने लगा है।परंपरागत रूप से लोग सोने-चांदी के गहनों, महंगे सामानों या प्लास्टिक से बने आइटम्स को उपहार के रूप में देते थे, जो न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक थे, बल्कि सामाजिक असमानता को भी बढ़ावा देते थे। अब लोग ईको फ्रेंडली उपहारों का चलन बढ़ा है, जिसमें लोग पौधे, हाथ से बने कंबल, खादी के कपड़े, हैंड मेड गिफ्ट देते हैं
4 of 5
शादी में आतिशबाजी
- फोटो : Adobe Stock
आतिशबाजी पर नियंत्रण
भारतीय शादियों में आतिशबाजी का चलन लंबे समय से रहा है। हालांकि, आतिशबाजी से होने वाले प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान के प्रति जागरूकता बढ़ी है। अब कई परिवार अपनी शादियों में आतिशबाजी का आयोजन करने से बच रहे हैं या फिर कम हानिकारक आतिशबाजी का चयन कर रहे हैं। इसके अलावा, कुछ लोग 'साइलेंट फायरवर्क्स' का विकल्प चुनते हैं, जो कम शोर करते हैं और पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाते हैं।
5 of 5
शादियों में बदलता चलन
- फोटो : instagram
शादी की सजावट में बदलाव
भारत में होने वाली शादियों में सजावट पर काफी ध्यान दिया जाता है। शादी कार्यक्रम में पारंपरिक रूप से फूलों का उपयोग होता रहा है। लेकिन पर्यावरणीय संसाधनों के संरक्षण के लिए लोग प्राकृतिक फूलों की बजाय कृत्रिम फूलों और सजावट के अन्य तरीकों का इस्तेमाल करने लगे हैं। इसके अलावा सजावट में कपड़े और रिसायकल सामग्री से बनी डेकोरेटिव चीजों का भी उपयोग होने लगा है, जो पर्यावरण के लिए भी अच्छा है और अधिक खर्चीला नहीं होता है।