कोरोना वायरस महामारी से दुनियाभर में आम जन-धन की अपूरणीय क्षति हुई है। लेकिन इस महामारी ने हमारी चेतना को जागृत करने का काम किया है। इस महामारी के दौर में फिर से अध्यात्म पर मंथन होता नजर आ रहा है। कोरोना काल में हर सचेत सामाजिक व्यक्ति के मन में चाहे वह किसी भी वर्ग और किसी भी स्तर का हो भावनाओं का बवंडर उठ रहा है। ऐसे में आज हम आपको 5 विचार मंथन के बारे में बताएंगे, जो इस महामारी के दौरान बहुत काम आएंगे। ये मंथन हमें ये एहसास जरूर कराएंगे कि हमारी आंतरिक खुशी से, अकेलेपन से, हमारी सोच के पुराने पैटर्न्स पर और भावनाओं के बहते समंदर में हमने बहुत कुछ जमा किया है या बहा दिया है।
कोरोना काल में अपनाएं ये 5 विचार, जीवन में बहुत आएंगे काम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रार्थना और ध्यान
कोरना वायरस महामारी में सभी लोग अपने-अपने स्तर पर प्रार्थना और ध्यान लगाना शुरू कर दिया है। चाहे वो ट्वीट करने वाला हो, सेलिब्रिटी हो, विद्यार्थी, मध्यमवर्गीय हो, व्यापारी, कामकाजी वर्ग या महिलाएं सभी ने अपनी दिनचर्या में प्रार्थना-ध्यान को जगह दी है और। सभी लोगों ने जरूरतमंदों की मदद की और मदद करने की इच्छा जताई।
प्रकृति की चिंता
कोरोना वायरस के चेन को तोड़ने के लिए दुनियाभर में लॉकडाउन की व्यवस्था लागू की गई। लॉकडाउन के कारण प्रदूषण जब अपने निम्न स्तर पर था, तो अधिकांश लोगों ने प्रकृति की बेहतरी पर प्रसन्नता जाहिर की। प्रकृति के बेहतर होने से और पशु पक्षियों को स्वतंत्र रूप में देखकर सबलोगों को खुशी महसूस हुई।
भरोसा और सकारात्मकता
इस घातक महामारी के दौर में मन को शांत रखना बोहद जरूरी है। व्यक्ति या समुदाय की बेहतरी करने की सोच तथा कल्याणकारी कार्य करने से प्रेरित ज्यादातर मनुष्य ने सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया। ऐसा करने से ये सभी लोग सोशल डिस्टेंसिंग या अकेलेपन की तकलीफ को गौण किया।
संवेदनशीलता
आम नागरिकों को अपने कर्मियों के प्रति संवेदनशील रहने के लिए समाजसेवी संस्थाओं ने प्रेरित किया। इसमें घर में काम करने वाले कर्मियों को वेतन देना साथ ही उनके दुख को समझना और उसमें शामिल होना आदि रहा।