चीन के वुहान शहर से फैलना शुरू हुए कोरोना वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार सुबह तक 79 देशों के 95 हजार से ज्यादा लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि की जा चुकी है। वहीं इस वायरस की वजह से मरने वालों की संख्या बढ़कर 3,280 के पार चली गई है। चीन के बाद दक्षिण कोरिया, इटली और ईरान में कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किये गए हैं।
कोरोनावायरस के डर से क्या-क्या चीजें जमा कर रहे हैं लोग?
लेकिन वे कौन-कौन चीजें हैं जिन्हें लोग जमा कर रहे हैं? और जमाखोरी की वजह से किन चीजों की आने वाले दिनों में कमी हो सकती है? उनकी एक लिस्ट हमने तैयार की है। आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले सर्जिकल मास्क वायरस के मामले में यूं तो सीमित सुरक्षा ही प्रदान करते हैं, लेकिन इनकी डिमांड दुनिया में इस वक्त सबसे ज्यादा है।
ऑनलाइन सामान बेचने वाली कंपनी अमेजन समेत तमाम बड़े मेडिकल विक्रेताओं का कहना है कि उनके पास जो मास्क हैं, वो बहुत तेजी से खत्म हो रहे हैं। ब्राजील की एक मेडिकल कंपनी जो बीते कुछ हफ्तों से मास्क का दोगुना उत्पादन कर रही है, उसके सीईओ मिगवेल लुइज ग्रिचेनो ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा, "लोग मास्क ऐसे खरीद रहे हैं जैसे वो गोल्ड हो।"
पश्चिमी देशों में मेडिकल किट जो कि सामान्य रूप से उपलब्ध होती है, वो भी नहीं मिल पा रही। कई देशों में प्रशासन यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि कुछ मेडिकल किट्स को डॉक्टरों के लिए रिजर्व कर लिया जाये ताकि मरीजों के इलाज के समय उन्हें इसकी किल्लत का सामना ना करना पड़े।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अनुमान के मुताबिक 'कोरोना वायरस के प्रकोप से लड़ते हुए हेल्थ कर्मियों के लिए करीब 9 करोड़ मास्क, 7.6 करोड़ जोड़ी दस्ताने और करीब 16 लाख चश्मों की जरूरत पड़ने वाली है।' डायरेक्टर जनरल टेडरोस अधानोम ने कहा है कि अगर जरूरी मेडिकल संसाधनों की कमी होती है, तो लोगों के इलाज में लगे डॉक्टरों और नर्सों के लिए यह लड़ाई और भी मुश्किल हो जाएगी।
दक्षिण कोरिया, जहां अब तक चीन के बाद कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किये गए हैं, वहां की सरकार ने मास्क के निर्यात पर बैन लगा दिया है। साथ ही मास्क के उत्पादन को भी बढ़ाया गया है। और तो और स्थानीय प्रशासन ने सीमा भी तय कर दी है कि एक आदमी एक हफ्ते में सिर्फ दो मास्क ही खरीद सकता है।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन ने मास्क की कमी होने पर देश से माफी भी मांगी है। वहीं, थाईलैंड में जहां मास्क की कमी को लेकर लोगों का आक्रोश सार्वजनिक तौर पर देखने को मिला है, वहां सरकार ने अधिकारियों की एक टीम बनाई है जो इस बात की निगरानी करेगी कि मास्क की कालाबाजारी तो नहीं हो रही या उन्हें ऊंची कीमत पर देश से बाहर तो नहीं भेजा जा रहा। भारत में भी मास्क थोक में खरीदे जा रहे हैं। दिल्ली एनसीआर में कोरोना वायरस के मामले दर्ज होने के साथ ही लोगों ने मास्क खरीदने शुरू कर दिए हैं।
सेनेटाइजर
मास्क की ही तरह हैंड सेनेटाइजर की भी कीमत दोगुनी हो गई है, जिसकी वजह है इसकी बढ़ी हुई मांग। फ्रांस में तो हैंड सेनेटाइजर सामान्य से तीन गुनी कीमत पर बेचे जा रहे हैं। सेनेटाइजर की बिक्री के लिए तेजी से विकसित हुए ब्लैक मार्केट पर नियंत्रण करना इस वक्त फ्रांस की सरकार के लिए अतिरिक्त चुनौती बन गया है।
फ्रांस के वित्त मंत्री ब्रूनो ली मेर ने चेतावनी दी है कि अगर विक्रेताओं ने मास्क और सेनेटाइजर तय कीमतों से अधिक पर बेचना बंद नहीं किया तो सरकार को इनकी कीमतें रेगुलेट करनी होंगी। पाकिस्तान सरकार ने भी विक्रेताओं को चेताया है कि मेडिकल किट या दवाओं की मुनाफाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ईरान के स्वास्थ्य मंत्री सईद नामाकी ने भी माना है कि कुछ कंपनियां सेनेटाइजर समेत अन्य जरूरी आइटमों को बहुत ज्यादा कीमतों पर बेच रहे हैं। सेनेटाइजर की बढ़ती मांग के कारण भारत के कई शहरों में भी सेनेटाइजर के रेट पहले से बढ़े हैं। ऐसी ही स्थिति रूस में भी देखी जा रही है।