भाई और बहन का रिश्ता बहुत अनोखा और पवित्र होता है। इस रिश्ते में हमेशा एकदूजे की खुशहाली की कामना होती है। रक्षाबंधन के बाद भाई-बहन को किसी दिन का इंतजार होता है तो वह है भाई दूज । इस साल पूरे देश में भाईदूज का त्योहार 16 नवंबर को मनाया जा रहा है। भाईयों के जीवन में बहन का बहुत अहम स्थान होता है और जिस तरह से भाई रक्षाबंधन पर बहन की रक्षा का वचन निभाता है ठीक उसी प्रकार भाई दूज के दिन बहन अपने वीरा की लंबी उम्र की कामना करती है। यदि भाई को तिलक करने का क्या सही तरीका है, ये आप जान लें तो आपकी यह कामना बिल्कुल हो सकती है पूरी। अगली स्लाइड्स से जानिए भाई को तिलक करने का सही तरीका।
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Bhaidooj 2020: भाईदूज के दिन बहन इस तरह करें भाई का तिलक, मिलेगा लंबी आयु का वरदान
Sun, 15 Nov 2020 12:25 AM IST
तेजस्वी मेहता
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: तेजस्वी मेहता
Updated Sun, 15 Nov 2020 12:25 AM IST
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रोली- अक्षत से करें तिलक
भाईदूज का पर्व प्रतिवर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें रोली और अक्षत से अपने भाई का तिलक कर, उनका मुंह मीठाकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। साथ ही भाई अपनी बहनों के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लेते हैं और तिलक और पूजन हो जाने के बाद भाई अपनी बहन को कुछ उपहार भी देते हैं।
भाईदूज का पर्व प्रतिवर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें रोली और अक्षत से अपने भाई का तिलक कर, उनका मुंह मीठाकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। साथ ही भाई अपनी बहनों के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लेते हैं और तिलक और पूजन हो जाने के बाद भाई अपनी बहन को कुछ उपहार भी देते हैं।
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इस तरह करें भाई का पूजन
भैया दूज के दिन सबसे पहले नहाकर तैयार हो जाएं। उसके बाद आटे का चौक तैयार कर लें। अगर आपने व्रत रखा है तो सूर्य को जल चढ़ाकर अपना व्रत शुरू करें। शुभ मुहूर्त देखकरभाई को चौक पर बिठाएं और उनके हाथों का पूजन करें। सबसे पहले भाई की हथेली में चावल का घोल लगाएं फिर उसमें सिंदूर, पान, सुपारी और फूल इत्यादि रखें। अंत में हाथों पर जल अर्पण कर मंत्रजाप करें। इसके बाद भाई का मुंह मीठा कराएं और खुद भी मीठा खाएं।
भैया दूज के दिन सबसे पहले नहाकर तैयार हो जाएं। उसके बाद आटे का चौक तैयार कर लें। अगर आपने व्रत रखा है तो सूर्य को जल चढ़ाकर अपना व्रत शुरू करें। शुभ मुहूर्त देखकरभाई को चौक पर बिठाएं और उनके हाथों का पूजन करें। सबसे पहले भाई की हथेली में चावल का घोल लगाएं फिर उसमें सिंदूर, पान, सुपारी और फूल इत्यादि रखें। अंत में हाथों पर जल अर्पण कर मंत्रजाप करें। इसके बाद भाई का मुंह मीठा कराएं और खुद भी मीठा खाएं।
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इस मंत्र का करें जाप
भाई दूज पर तिलक करते समय ये मंत्र पढ़ें- गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज कोसुभद्रा पूजे कृष्ण को गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें फूले फलें।
शाम के समय यमराज के नाम का चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर जरूर जलाएं। मान्यता है कि इस दिन अगर बड़े से बड़ा पशु काट भी ले तो यमराज के दूत भाई के प्राण नहीं ले जाएंगे।
भाई दूज पर तिलक करते समय ये मंत्र पढ़ें- गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज कोसुभद्रा पूजे कृष्ण को गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें फूले फलें।
शाम के समय यमराज के नाम का चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर जरूर जलाएं। मान्यता है कि इस दिन अगर बड़े से बड़ा पशु काट भी ले तो यमराज के दूत भाई के प्राण नहीं ले जाएंगे।