11 अक्टूबर को महानायक अमिताभ बच्चन का जन्मदिन होता है। सदी के महानायक या बॉलीवुड के शहंशाह ऐसे कितने ही नाम उनको दिए गए हैं। अभी हाल ही में दादा साहब फाल्के अवार्ड से नवाजे गए अमिताभ बच्चन जितने अच्छे अभिनेता हैं उतने ही अच्छे इंसान भी। अपने फिल्मी करियर में अलग मुकाम हासिल करने वाले महानायक अभिनेता का जीवन भी हमेशा सुर्खियों में रहता है। फिल्मी दुनिया के अलावा एक समय था जब अमिताभ राजनीति का रुख किए थे। अतीत की बात करें तो अमिताभ बच्चन और गांधी परिवार के बीच रिश्ता भी कुछ खास था। आइए जानते हैं इस रिश्ते के बारे में विस्तार से...
जन्मदिन विशेष: अमिताभ बच्चन और गांधी परिवार के रिश्ते की कहानी
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इतिहास गांधी परिवार और बच्चन परिवार के रिश्तों में उतार चढ़ाव का गवाह रहा है। दोनों परिवार एक दूसरे के लंबे समय तक दोस्त रहे हैं, लेकिन उसके बाद बच्चन-गांधी परिवार के संबंधों में विश्वास और भरोसे की गाड़ी पटरी से उतर गई। दोनों परिवारों के रिश्ते की कहानी किसी बॉलीवुड ड्रामा से कम नहीं है, जहां कई ट्विस्ट और टर्न हैं।
अमिताभ बच्चन के पिता विदेश मंत्रालय में हिंदी अधिकारी के रूप में काम करते थे। प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू उनकी बहुत इज्जत करते थे और इलाहाबाद में रहते हुए दोनों परिवार बहुत करीब आ गए।
अमिताभ बच्चन की मां तेजी बच्चन, नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी की बहुत अच्छी दोस्त बन गईं। बाद में जब बच्चन परिवार दिल्ली शिफ्ट हुआ, तेजी बच्चन को सोशल एक्टिविस्ट के रूप जाना जाने लगा और इंदिरा के साथ उनकी दोस्ती गहरी होती गई।
1984 में इंदिरा गांधी की हत्या तक दोनों परिवारों के संबंध बहुत घनिष्ठ रहे। यह रिश्ता अमिताभ और राजीव गांधी की दोस्ती के रूप में आगे बढ़ता गया।
यह अमिताभ बच्चन ही थे, जो 13 जनवरी 1968 की सुबह कड़ाके की सर्दी में पालम एयरपोर्ट पर सोनिया गांधी को लेने पहुंचे। इस दिन सोनिया गांधी, राजीव की मंगेतर के रूप में भारत पहुंची थी। सोनिया को बच्चन परिवार के घर ठहराया गया और तेजी ने उनको भारतीय संस्कृति और तौर तरीकों के बारे में समझाया।
खबरों के मुताबिक राजीव गांधी जब सोनिया गांधी से शादी करने की तैयारी में थे, तेजी बच्चन ने ही मध्यस्थ के रूप में भूमिका निभाई और इंदिरा गांधी को इसके लिए तैयार किया। इंदिरा गांधी एक इटैलियन लड़की से अपने बेटे की शादी को लेकर अनिच्छुक थीं।
1969 में जब सोनिया और राजीव गांधी की शादी पक्की हो गई, सोनिया और उनका परिवार कुछ दिनों के लिए 13, विलिंगडन क्रीसेंट स्थित बच्चन परिवार के आवास पर ठहरा।
1984 में अमिताभ और राजीव गांधी के रिश्ते नई ऊंचाई पर थे, राजीव गांधी ने अपने दोस्त अमिताभ बच्चन को कांग्रेस के टिकट पर इलाहाबाद से चुनाव लड़ने के लिए तैयार कर लिया।
1984 में अमिताभ बच्चन को इलाहाबाद से कांग्रेस का टिकट मिला और उन्होंने बड़े अंतर से हेमवती नंदन बहुगुणा को हराया। दोनों परिवारों के लिए यह गर्व का क्षण था।
इसके बाद दिल्ली में अमिताभ बच्चन कांग्रेस की यूथ ब्रिगेड का हिस्सा बन गए। सतीश शर्मा, अरूण नेहरू, अरूण सिंह और कमलनाथ के साथ उनकी तुलना होने लगी।
तीन साल बाद अमिताभ ने राजनीति छोड़ दी और इस्तीफा दे दिया। दरअसल, एक अखबार ने बोफोर्स घोटाले में उनकी संलिप्तता को लेकर खबर छापी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट की ओर से अमिताभ बच्चन को इस मामले में क्लीन चिट मिल गई।
रक्षा सौदे ने दो पुराने दोस्तों में मतभेद के बीज रोप दिए। बुरे हालात में भी दोनों परिवारों ने रिश्ते का दिखावा बनाए रखा और प्रियंका गांधी की शादी में अमिताभ बच्चन भी शामिल हुए।
राजनीति में छोटी पारी खेलने के बाद अमिताभ बच्चन 1988 में एक बार फिर बॉलीवुड में लौटे, लेकिन शहंशाह की सफलता के बाद बॉक्स ऑफिस पर उनकी फिल्में औंधे मुंह गिरी।
1991 में फिल्म 'हम' के हिट होने के बाद लगा कि अमिताभ की किस्मत पलटेगी, लेकिन क्षणिक सफलता का समय था। 1992 के बाद अमिताभ बच्चन को पांच सालों के लिए एक तरह से फिल्मों से संन्यास लेना पड़ा।
1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद दोनों परिवारों के रिश्ते बिगड़ते गए। गांधी परिवार को महसूस हो रहा था कि बुरे वक्त में अमिताभ बच्चन उन्हें अकेला छोड़कर चले गए। एक परिवार जो प्रधानमंत्री के आवास में कभी भी आ जा सकता था, अचानक से उसे 'अछूत' समझा जाने लगा।
दूसरी ओर अमिताभ बच्चन का कहना था कि गांधी परिवार उन्हें राजनीति में लेकर आया और परेशानी के समय उन्हें बीच में ही छोड़ गया। इसके साथ ही जब बच्चन की कंपनी एबीसीएल दिवाला हो गई और अमिताभ आर्थिक संकट से जूझ रहे थे, गांधी परिवार ने उनकी मदद नहीं की। इस संकट ने दोनों परिवारों के रिश्ते को डुबो दिया और अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन अपनी निराशा को पब्लिक से छुपा नहीं पाईं।
इसी बीच अमिताभ की जिंदगी में अमर सिंह की एंट्री होती है और समाजवादी नेता ने बिगबी की पूरी मदद की। अमिताभ और अमर की दोस्ती बढ़ती गई और आगे चलकर समाजादी पार्टी की ओर से जया बच्चन को राज्यसभा का सांसद बनाया गया। अमिताभ बच्चन के अमर सिंह के साथ जाने से गांधी परिवार के साथ उनकी दूरी बढ़ती गई।