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महात्मा गांधी जिन 8 महिलाओं के करीब रहे

Wed, 02 Oct 2019 03:16 PM IST
ललित फुलारा लाइफस्टाइल डेस्क,अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क,अमर उजाला Published by: ललित फुलारा Updated Wed, 02 Oct 2019 03:16 PM IST
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150th Mahatama gandhi jayanti 2019: gandhiji and his eight women associates

आपने महात्मा गांधी की तस्वीरों पर ग़ौर किया है? ज़्यादातर तस्वीरों में गांधी के क़रीब काफी लोगों की भीड़ दिखाई देती है। इस भीड़ में कुछ नाम ऐसे लोगों के रहे, जिन्हें भारत का लगभग हर नागरिक जानता है. मसलन जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल या कस्तूरबा गांधी। लेकिन गांधी के क़रीब रही इसी भीड़ में कुछ लोग ऐसे भी रहे, जिनके बारे में शायद कम ही लोग जानते हों। हम आपको यहां कुछ ऐसी ही महिलाओं के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मोहनदास करमचंद गांधी के विचारों की वजह से उनके बेहद क़रीब रहीं। इन महिलाओं की ज़िंदगी में गांधी का गहरा असर रहा और जिस रास्ते पर महात्मा ने चलना शुरू किया था, ये महिलाएं उसी रास्ते पर चलते हुए अपनी-अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ीं। 

150th Mahatama gandhi jayanti 2019: gandhiji and his eight women associates
महात्मा गांधी - फोटो : अमर उजाला
मेडेलीन स्लेड उर्फ मीराबेन, 1892-1982
मेडेलीन ब्रिटिश एडमिरल सर एडमंड स्लेड की बेटी थीं. एक ओहदेदार ब्रिटिश अफसर की बेटी होने के चलते उनकी ज़िंदगी अनुशासन में गुज़री। मेडेलीन जर्मन पियानिस्ट और संगीतकार बीथोवेन की दीवानी थीं. इसी वजह से वो लेखक और फ़्रांसीसी बुद्धिजीवी रोमैन रौलेंड के संपर्क में आई। ये वही रोमैन रौलेंड थे, जिन्होंने न सिर्फ संगीतकारों पर लिखा बल्कि महात्मा गांधी की बायोग्राफी भी लिखी। गांधी पर लिखी रोमैन की बायोग्राफी ने मेडेलीन को काफी प्रभावित किया।गांधी का प्रभाव मेडेलीन पर इस कदर रहा कि उन्होंने ज़िंदगी को लेकर गांधी के बताए रास्तों पर चलने की ठान ली। गांधी के बारे में पढ़कर रोमांचित हुई मेडेलीन उन्हें ख़त लिखकर अपने अनुभव साझा किए और आश्रम आने की इच्छा ज़ाहिर की। शराब छोड़ने, खेती सीखना शुरू करने से लेकर शाकाहारी बनने तक. मेडेलीन ने गांधी का अख़बार यंग इंडिया भी पढ़ना शुरू किया. अक्टूबर 1925 में वो मुंबई के रास्ते अहमदाबाद पहुंची। गांधी से अपनी पहली मुलाकात को मेडेलीन ने कुछ यूं बयां किया, 'जब मैं वहां दाखिल हुई तो सामने से एक दुबला शख्स सफेद गद्दी से उठकर मेरी तरफ बढ़ रहा था. मैं जानती थी कि ये शख्स बापू थे। मैं हर्ष और श्रद्धा से भर गई थी,मुझे बस सामने एक दिव्य रौशनी दिखाई दे रही थी. मैं बापू के पैरों में झुककर बैठ जाती हूं. बापू मुझे उठाते हैं और कहते हैं- तुम मेरी बेटी हो। मेडेलिन और महात्मा के बीच इस दिन से एक अलग रिश्ता बन गया। बाद में मेडेलिन का नाम मीराबेन पड़ गया। 
150th Mahatama gandhi jayanti 2019: gandhiji and his eight women associates
महात्मा गांधी - फोटो : अमर उजाला
निला क्रैम कुक

खुद को कृष्ण की गोपी मानने वाली निला माउंटआबू में एक स्वामी (धार्मिक गुरु) के साथ रहती थीं। अमरीका में जन्मी निला को मैसूर के राजकुमार से इश्क हुआ। निला ने साल 1932 में गांधी को बंगलुरु से खत लिखा था। इस खत में उन्होंने छुआछुत के ख़िलाफ किए जा रहे कामों के बारे में गांधी को बताया। दोनों के बीच खतों का सिलसिला यहां से शुरू हुआ। अगले बरस फरवरी 1933 में निला की मुलाकात यरवडा जेल में महात्मा गांधी से हुई। गांधी निला को साबरमती आश्रम भेजते हैं, जहां कुछ वक्त बाद ही वो नए सदस्यों से खास जुड़ाव महसूस करने लगी थी। उदार ख्यालों वाली निला के लिए आश्रम जैसे एकांत माहौल में फिट होना मुश्किल भरा रहा। ऐसे में वो एक दिन आश्रम से भाग गईं। बाद में वो एक रोज़ वृंदावन में मिलीं थी। कुछ वक्त बाद उन्हें अमरीका भेज दिया गया, जहां उन्होंने इस्लाम कबूल लिया और कुरान का अनुवाद किया। 

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सरला देवी चौधरानी (1872-1945)

उच्च शिक्षा, सौम्य सी नज़र आने वाली सरला देवी की भाषाओं, संगीत और लेखन में गहरी रुचि थी।सरला रविंद्रनाथ टैगोर की भतीजी भी थी। लाहौर में गांधी सरला के घर पर ही रुके थे। ये वो दौर था, जब सरला के स्वतंत्रता सेनानी पति रामभुज दत्त चौधरी जेल में थे। दोनों एक-दूजे के काफी क़रीब रहे। इस करीबी को समझने का एक अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि गांधी सरला को अपनी 'आध्यात्मिक पत्नी' बताते थे। बाद के दिनों में गांधी ने ये भी माना कि इस रिश्ते की वजह से उनकी शादी टूटते-टूटते बची। गांधी और सरला ने खादी के प्रचार के लिए भारत का दौरा किया।दोनों के रिश्ते की ख़बर गांधी के करीबियों को भी रही। हक जमाने की सरला की आदत के चलते गांधी ने जल्द उनसे दूरी बना ली। कुछ वक्त बाद हिमालय में एकांतवास के दौरान सरला की मौत हो गई। 

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 सरोजिनी नायडू (1879-1949)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष सरोजनी नायडू। गांधी की गिरफ्तारी के बाद नमक सत्याग्रह की अगुवाई सरोजिनी के कंधों पर थी। सरोजिनी और गांधी की पहली मुलाकात लंदन में हुई थी। इस मुलाकात के बारे में सरोजिनी ने कुछ यूं बताया था, ''एक छोटे कद का आदमी, जिसके सिर पर बाल नहीं थे। ज़मीन पर कंबल ओढ़े ये आदमी जैतून तेल से सने हुए टमाटर खा रहा था। दुनिया के मशहूर नेता को यूं देखकर मैं खुशी से हंसने लगी, तभी वो अपनी आंख उठाकर मुझसे पूछते हैं, 'आप ज़रूर मिसेज़ नायडू होंगी। इतना श्रद्धाहीन और कौन हो सकता है? आइए मेरे साथ खाना शेयर कीजिए.''जवाब में सरोजिनी शुक्रिया अदा करके कहती हैं, क्या बेकार तरीका है ये?और इस तरह सरोजिनी और गांधी के रिश्ते की शुरुआत हो गई थी। 

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