ऑफिस में अगर सैलरी मनचाही मिल जाए तो काम में भी मन लगा रहता है। अच्छे कर्मचारी जल्दी नौकरी छोड़ कर न जाए इसके लिए विदेशों में कंपनियां तरह-तरह के तरीके ईजाद कर रही है। ब्रिटेन और यूरोप की कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों को अपनी सैलरी खुद ही तय करने दे रही है।
वही, कुछ कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को खुश रखने के लिए उन्हें फ्री सिनेमा टिकट, जिम के पास जैसी तमाम सुविधाएं देती है। एक रिसर्च के मुताबिक 84% युवा अपने शुरुआती दो साल में ही नौकरी बदल लेते हैं। इसे रोकने के लिए कंपनियां अपनी सैलरी खुद तय करने का सुझाव लेकर आई हैं।
ब्रिटेन की ग्रान्टट्री कंपनी में 45 कर्मचारी हैं। इस कंपनी ने अपने कर्मचारियों से अपना पूरा बजट शेयर किया है। जिसके बाद सभी कर्मचारियों ने अपने काम का मूल्यांकन कर खुद ही कर अपनी सैलरी तय की।
ब्रिटेन के ह्यूमन रिसोर्स प्रोफेशनल्स ऑर्गनाइजेशन ने कहा कि इससे सैलरी में पारदर्शिता आएगी। लेकिन उन्होंने बताया कि इसे काफी सावधानी के साथ लागू करना होगा। अगर इसको सही प्रकार से लागू नहीं किया गया तो इसका प्रभाव उल्टा भी पड़ सकता है।
ब्रिटेन के पॉड ग्रुप ने कहा कि कभी-कभी कर्मचारी मार्केट रेट से ज्यादा पैसा मांग लेते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि वे लालची हैं। बल्कि यह उनकी समझ की कमी की वजह से हैं। एक बार एक जूनियर कर्मचारी ने सैलरी में 50% की वृद्दि मांग की।
तब साथ काम करने वाले लोगों ने उसे समझाया कि तुम इतनी सैलरी अपने काम के हिसाब से सही साबित नहीं कर पाओगे। लिहाजा इसके चलते भविष्य में तुम्हें अपनी नौकरी से हाथ थोना पड़ सकता है। स्मार्केट कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर टॉम हार्डमैन ने बताया कि फिलहाल सैलरी का खुद निर्णय करने वाली नीति ज्यादातर टेक कंपनियों में है।