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UPSC के इन सात होनहारों की सफलता की कहानियों के लिए जाना जाएगा जम्मू-कश्मीर
amarujala.com- Presented by: श्रेयांश त्रिपाठी
Updated Sun, 11 Jun 2017 01:06 AM IST
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यूपीएससी
- फोटो : pti
आतंक से जूझ रहे कश्मीर में अब युवाओं के रोल माडल बदल रहे हैं। यही वजह है कि यूपीएससी में कामयाबी हासिल करने वाले युवाओं की तादाद में दोगुनी बढ़ोतरी है। रियासत में पहली बार बीस युवाओं ने इस परीक्षा में सफलता हासिल की है। इनमें डाक्टर हैं, इंजीनियर हैं, तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने रिसर्च की जगह सिविल सर्विसेज को तरजीह दी, ताकि वे बड़े दायरे में समाज को कुछ देने की कूवत हासिल कर सकें।
UPSC
- फोटो : Amar Ujala
सिविल से बीटेक कर चुके और वर्तमान में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में असिस्टेंट इंजीनियर के रूप में कार्यरत जफर इकबाल ने परीक्षा में 39वीं रैंक हासिल की है। अपनी रियासत के लोगों के लिए कुछ करने की तमन्ना लिए जफर ने यूपीएससी की तरफ रुख किया था। सरकारी स्कूल से पांचवीं के बाद सूरनकोट के जवाहर नवोदय विद्यालय से 12वीं करने वाले जफर इकबाल केवल सेवा को ही अपनी प्राथमिकता करार देते हैं। मेंढर, सब डिवीजन पुंछ के रहने वाले मोहम्मद इकबाल और जतून बेगम के पुत्र जफर ने एनआईटी हमीरपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी और इसके बाद सिविल सर्विसेज का सपना पूरा करने में जुट गए।
UPSC
- फोटो : Amar Ujala
65वीं रैंक हासिल की है। दिल्ली के सेंट स्टीफंस कालेज से एमएससी फिजिक्स करने वाली आयुषी पूरी तरह सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुटी थीं। यह उनका दूसरा प्रयास था। आयुषी की तमन्ना है कि उन्हें जेएंडके कैडर अलॉट हो, ताकि वह पूरी तरह से अपने लोगों की सेवा कर सकें। इससे पहले आयुषी की इच्छा रिसर्च करने की थी, लेकिन उसके सीमित क्षेत्र को देखते हुए उन्होंने सिविल सर्विसेज की तरफ रुख कर लिया और इसकी तैयारी में जुट गईं। अपनी कामयाबी का श्रेय आयुषी अपने पिता डा. हरबंस लाल सूदन के साथ ही टीचर रहीं मां नीरू शर्मा को देती हैं। पिता सेवानिवृत्ति के बाद शांति देवी मेमोरियल अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं। एमडी कर रहे भाई आदित्य सूदन को भी वह याद करना नहीं भूलतीं। बकौल आयुषी उन्होंने फोकस बंधाने में बहुत मदद की।
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UPSC
- फोटो : Amar Ujala
जम्मू के अखिल महाजन ने यूपीएससी के नतीजों में 213वीं रैंक हासिल की है। नई बस्ती निवासी एक किराना व्यापारी राकेश गुप्ता और मां उर्मिल गुप्ता के पुत्र अखिल ने हैदराबाद की जवाहर लाल नेहरू टेक्निकल यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग करने के बाद सिविल सर्विसेज को लेकर अपने इरादे जाहिर कर दिए और जम्मू आ गए। यहां पिता का हाथ बंटाते हुए उन्होंने कामयाबी हासिल की। अखिल के मुताबिक कैडर अलाट होने के बाद वह प्राथमिकता तय करेंगे। यह तय है कि लोगों की समस्याओं को दूर करना उनकी प्राथमिकता जरूर रहेगा।
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UPSC
- फोटो : Amar Ujala
श्रीनगर की बिसमां काजी ने 115वीं रैंक हासिल की है। एमबीबीएस के लिए कोशिश कर चुकी बिसमा ने बाद में इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग की राह चुनी, लेकिन मन में सिविल सर्विसेज का सपना हिलोरे मार रहा था। बिसमा के मुताबिक यह परीक्षा बहुत मुश्किल नहीं। जरूरत बस फोकस की है और लड़कियों के लिए इससे बेहतर कुछ नहीं। उन्होंने कामयाबी का श्रेय मां-बाप को दिया। कहा कि उन्होंने सुकून भरा माहौल दिया, जिसने पढ़ाई में मदद की। बिसमा की सफलता से उत्साहित उनकी छोटी बहन इनशा क़ाज़ी ने उन्हीं के नक्श-ए-कदम पर चलने की बात दोहराई। बिसमा की मां हालीमा काजी ने बेटी के दूसरी लड़कियों के लिए मिसाल बनने की बात दोहराई। बिसमा के पिता मोहम्मद शफी काजी ने बेटी की तरफ नाज से देखते हुए कहा कि बिसमा रात भर पढ़ती रहती थी, मेहनत करती थी, जिसका फल उसे मिल ही गया। इंजीनियरिंग बैक ग्राउंड से ताल्लुक रखने वाला भाई भी खुश नजर आया।