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सेना के साथ और जज्बे के बल पर सपने को पूरा करने को बेताब हैं दिव्यांग आमिर
फिदा हुसैन, अमर उजाला/अनंतनाग
Updated Mon, 27 Nov 2017 09:36 PM IST
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Aamir
- फोटो : File Photo
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कहते हैं अगर आपके अंदर हौसला हो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं होता। इस बात को सच कर दिखाया है दक्षिणी कश्मीर के वागहामा के रहने वाले आमिर ने। एक हादसे में आमिर को अपने दोनों हाथ गंवाने पड़े। उसके बाद भी वे एक बेहतरीन क्रिकेटर हैं। आमिर की प्रसिद्धि का अंदाज इसी बात से लगा सकते हैं कि उनका मैच देखने के लिए दूरदराज से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
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आमिर हादसे का जिक्र करते हुए बताते हैं कि बचपन में वे भी सभी बच्चों की तरह सामान्य जीवन जी कर रहे थे, लेकिन 1997 में हुए एक हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी।
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आमिर ने बताया कि एक दिन वे अपने माता-पिता के लिए खाना लेकर मिल में गए थे, जब उनके माता-पिता खाना खाने में व्यस्त थे उसी वक्त वे मिल में लगी मशीनों से छेड़छाड़ करने लगे।
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मशीन में उनके दोनों हाथ फंस गए और कंधे से कट गए। उस वक्त उनकी उम्र सात साल थी। हादसे के बाद करीब सात महीनों तक उन्हें अस्पताल में रहना पड़ा।
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आमिर क्रिकेट के शौकीन थे और क्रिकेटर बनना चाहता थे, लेकिन दोनों हाथ खोने की वजह से उनका हौसला टूटता जा रहा था। अस्पताल से छुट्टी के कुछ ही दिन बाद आमिर फिर से बीमार पड़ गए। इलाज के लिए पैसे नहीं होने की वजह से उसके घर वालों को जमीन तक बेचनी पड़ी।