फिल्म 'बादशाहो' में एक खजाने का जिक्र किया गया है। खजाना जिसे इमरजेंसी के वक्त किले से निकालकर ले जाया गया। खजाना इतना था कि जिसने देखा या सुना वो दंग रह गया। इतना खजाना आखिर आया कहां से था। जिस खजाने को लूटा गया, वह उस किले में कब और कैसे पहुंचा। इसे लेकर भी कई तरह की कहानियां प्रचलित हैं। इन कहानियों की मानें तो इस खजाने को जमा करने वाले राजा मानसिंह थे।
अकबर से छिपाकर इस किले में लाया जाता था ये खजाना
दरअसल यह कहानी जयपुर के पूर्व राजघराने और जयगढ़ किले से जुड़ी है। कहा जाता है कि राजा मानसिंह प्रथम ने इस खजाने को जमा किया था। यह खजाना वे लड़ाइयों में जीत कर लाते और अकबर से छिपाकर यहां जमा करते थे। धीरे धीरे यह खजाना अकूत दौलत के रूप में जमा हो गया।
मानसिंह ने अकबर से की थी ये संधि
खजाने की दूसरी कहानी की मानें तो खजाने का संबंध अकबर और मानसिंह के बीच एक संधि से जुड़ा है। कहा जाता है कि दोनों के बीच एक अलग तरह की संधि थी। मानसिंह अकबर के लिए लड़ाई करन जाते थे। सेनापति के रूप में वे अकबर की सेना की कमान संभालते, जिन राज्यों पर आक्रमण करते और उन्हें जीतते, उन राज्यों की सत्ता अकबर के हाथ में जाती और उनका खजाना मानसिंह को मिलता।
अफगानिस्तान से जीता था ये खजाना!
कुछ लोगों का कहना है कि मानसिंह ने अकबर की तरफ से अफगानिस्तान में युद्ध किए थे। उन्होंने अफगानिस्तान और दूसरे कई राज्यों को जीता था। इस जीत के बाद जो खजाना हासिल किया, वो लाकर जयगढ़ में गाड़ दिया। मानसिंह के इस खजाने की चर्चा जोरों से चलने लगी थी।
अंग्रेजों को भी पता था इस खजाने के बारे में
इमरजेंसी के समय खजाने को तलाशने के लिए कवायद तो बाद में शुरू हुई थी। उससे पहले ब्रिटिश शासन काल में भी इस खजाने को लेकर चर्चाएं जोरों पर हुई थीं। जानकारी होने के बावजूद अंग्रेजों ने इस खजाने को तलाशने की कोशिश नहीं की।