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GST की ऐसी मार, 'तीखा' हुआ चटपटा आचार
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 17 Jul 2017 05:26 PM IST
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जीएसटी लगने के बाद से जहां खाद्य पदार्थ महंगे हुए हैं तो वहीं इसका किचन से लेकर लोगों के स्वाद पर भी देखने को मिल रहा है। पूरे भारत में लोकप्रिय राजस्थान के भरतपुर जिले के भुसावर के तरह-तरह के आचार पर भी जीएसटी का सीधा असर पड़ा है।
यहां के तरह तरह के आचारों का नाम सुनकर ही मुंह में पानी आ जाया करता था अब इनके भाव सुनकर खरीददारों के पसीने छूट रहे हैं। इस बार सब्जी मंडी में कच्चे आम, लिसौड़े, टैंटी आदि वनस्पति उत्पादों पर भी महंगाई की मार,मंडियों में भारी अभाव होने से इनके भाव बढ़ने लगे है।
यूं तो चटनी-अचार गरीबों के भोजन का प्रमुख हिस्सा कहलाता है। लेकिन इस बार अचार बनाने के काम आने वाली कच्चे आम रूपी कैरी, लिसौड़े,टैंटी व चटनी बनाने के काम आने वाले हरा धनियां व हरी मिर्च और टमाटर आदि के भाव आसमान छूने के कारण सम्पन्न वर्ग की पहुंच से भी दूर बने हुए हैं।
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यहां के तरह तरह के आचारों का नाम सुनकर ही मुंह में पानी आ जाया करता था अब इनके भाव सुनकर खरीददारों के पसीने छूट रहे हैं। इस बार सब्जी मंडी में कच्चे आम, लिसौड़े, टैंटी आदि वनस्पति उत्पादों पर भी महंगाई की मार,मंडियों में भारी अभाव होने से इनके भाव बढ़ने लगे है।
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यूं तो चटनी-अचार गरीबों के भोजन का प्रमुख हिस्सा कहलाता है। लेकिन इस बार अचार बनाने के काम आने वाली कच्चे आम रूपी कैरी, लिसौड़े,टैंटी व चटनी बनाने के काम आने वाले हरा धनियां व हरी मिर्च और टमाटर आदि के भाव आसमान छूने के कारण सम्पन्न वर्ग की पहुंच से भी दूर बने हुए हैं।
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देसी कैरी बाजार से गायब और जो हैं उनमें स्वाद नहीं
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गृहणी शांतीदेवी व रूपकला देवी ने बताया कि इस बार मंडी में लिसौड़े व टैंटी जैसे वनस्पति उत्पादों की काफी कमी रहने से इनका अचार भी नहीं डाल सकी। इनका अचार प्राकृतिक एंटी बायटिक बताया जाता है। इसके बाद वह कैरी आने पर कैरी का अचार डालने का इंतजार करती रही, लेकिन इस पीक सीजन में भी लोकल देशी कैरी नहीं आई।
अब मंडी में वैरायटी नस्ल की दशहरी लंगड़ा व रामकेला कच्ची कैरी आ रही है। जिनके भाव आसमान छूने से पसीने छूटने लगते हैं। जून-जुलाई के महीने में आमतौर पर 10 से 20 रुपए किलो बिकने वाली कच्ची कैरी इस बार 70 से 90 रुपए किलो तक बिक रही है। जिसका अचार भी देसी कैरी के अचार जैसा स्वादिष्ट व चटपटा नहीं होता है।
चटनी बनाने का हरा धनिया 20 रुपए का 100 ग्राम व हरीमिर्च 10 रुपए की 100 ग्राम, लाल टमाटर 80 रुपए किलो, करौंदे 20-25 रुपए पाव मिल रहे हैं। सब्जी विक्रेता मुरारी , बहादुर ने बताया कि इस बार मौसम की बेरूखी के चलते लिसौड़े, टैंटी व कच्चे आम का लोकल देशी उत्पादन नाम मात्र का हुआ है। जिससे मंडी में इनकी आवक व बिक्री के साथ धंधा भी प्रभावित हुआ है।
अब मंडी में वैरायटी नस्ल की दशहरी लंगड़ा व रामकेला कच्ची कैरी आ रही है। जिनके भाव आसमान छूने से पसीने छूटने लगते हैं। जून-जुलाई के महीने में आमतौर पर 10 से 20 रुपए किलो बिकने वाली कच्ची कैरी इस बार 70 से 90 रुपए किलो तक बिक रही है। जिसका अचार भी देसी कैरी के अचार जैसा स्वादिष्ट व चटपटा नहीं होता है।
चटनी बनाने का हरा धनिया 20 रुपए का 100 ग्राम व हरीमिर्च 10 रुपए की 100 ग्राम, लाल टमाटर 80 रुपए किलो, करौंदे 20-25 रुपए पाव मिल रहे हैं। सब्जी विक्रेता मुरारी , बहादुर ने बताया कि इस बार मौसम की बेरूखी के चलते लिसौड़े, टैंटी व कच्चे आम का लोकल देशी उत्पादन नाम मात्र का हुआ है। जिससे मंडी में इनकी आवक व बिक्री के साथ धंधा भी प्रभावित हुआ है।