भारत में घुसपैठ करवाने के लिए पाकिस्तान में फर्जी पासपोर्ट के गोरखधंधे का जीता जागता सबूत उसी के फर्जी नागरिक ने दिया है।
भारत से पहुंचा था पाकिस्तान फिर 27 साल बाद लौटा
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फाइल फोटो
- फोटो : Amar Ujala
अपने परिवार से नाराज होकर 27 साल पहले सीमावर्ती जिले जैसलमेर के सम क्षेत्र का निवासी हासम खान अवैध तारबंदी पार कर पाकिस्तान चला गया था और पाकिस्तान में अपनी बहन के पास रहने लग गया। हासम ने बताया कि वो अपने बहनोई की मृत्यु के बाद बहन व भांजे के साथ पाक में रहने लग गया था।
मात्र 6000 रूपए देकर बनवाया पहला फर्जी पासपोर्ट
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फर्जी पासपोर्ट
- फोटो : Amar Ujala
दो साल पहले उसका भांजा बीमार पड़ गया था जिसका ईलाज गुजरात के अहमदाबाद में कराया गया। सबसे पहले 2012 में उसने पहला फर्जी पासपोर्ट फतेह खान नाम के एजेंट से 3000 की जगह 6000 रुपये देकर बनवाया लेकिन किन्ही कारणों से भारत नही आ सका और वह पासपोर्ट बरसात में खराब हो गया । उस दलाल का फर्जी पासपोर्ट का ही काम था ।
पासपोर्ट के बाद, फर्जी वीजा भी हुआ तैयार
उसके बाद 2015 में दूसरा फर्जी पासपोर्ट बनवाया उसमे उसका नाम गुलाम मुस्तफा बताया उसी पासपोर्ट से वीसा लेकर वह भारत आया । वीसा के लिए करीब 35000 का खर्चा आया।
केवल 1 हजार रूपए में मिली पाक नागरिकता
हासम ने बताया कि वो जैसलमेर के शाहगढ़ बॉर्डर से नहीं बल्कि अटारी रेल मार्ग से पासपोर्ट एवं वीजा लेकर भारत लौटा था। 1990 में वह अवैध रूप जैसलमेर से पाकिस्तान जाने के बाद उसने वर्ष 2003 में उसने मात्र 1000 रूपए में पाकिस्तानी नागरिकता लेकर गुलाम मुस्तफा पुत्र पीर बक्स के नाम से अपना पाकिस्तानी आई कार्ड भी बनवा लिया।