साहित्य के महाकुंभ में फिल्म पद्मावत का मुद्दा लगातार छाया हुआ है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के आज चौथे दिन प्रसिद्ध लेखिका शोभा डे ने पद्मावत मुद्दे पर बात करते हुए सरकार और प्रशासन के रवैये पर ही सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि करणी सेना की धमकी से कोई फर्क नहीं पड़ता।
ऐसे मुख्यमंत्री किस काम के
शोभा डे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से फिल्म पद्मावत को हरी झंडी मिलने के बावजूद कुछ प्रदेशों की सरकारें अपने यहां कानून व्यवस्था संभालने में नाकाम रही। उन्होनें आगे कहा कि ऐसे लोगों को मुख्यमंत्री रहने का कोई हक नहीं जो अपने प्रदेश में कानून व्यवस्था ही ना संभाल पाए। बता दें कि आज शोभा डे का जेएलएफ में “दोज वर द डेज” सेशन आयोजित हुआ जिसमें उनसे पत्रकार वीर सांघवी ने चर्चा की।
विरोध किस बात का कर रहे हैं...
शोभा डे ने 'पद्मावत' पर ही चर्चा को जारी रखते हुए कहा, 'मैंने 'पद्मावत' फिल्म देखी है और मैं कह सकती हूं कि इस फिल्म पर तो राजपूतों को गर्व होना चाहिए। मुझे अभी तक समझ नहीं आ रहा है कि वे विरोध किस बात का कर रहे हैं।'
श्याम बेनेगल के नाटक में भी यही सब दिखाया गया था
डे ने श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित धारावाहिक 'भारत एक खोज' का हवाला देते हुए कहा कि बेनेगल रानी पद्मिनी वाला किस्सा अपने धारावाहिक में पहले ही दिखा चुके हैं, लेकिन तब कोई विरोध नहीं हुआ था। आज के दौर में केवल ऐसे विषयों का राजनीतिकरण करके कोई नया मुद्दा खड़ा कर दिया जाता है।
बच्चों पर पत्थर फेंके, ये कैसा विरोध
5 of 7
गुरुग्राम न्यूज़
- फोटो : SELF
शोभा डे ने गुरुग्राम में स्कूली बच्चों की बस को प्रदर्शनकारियों द्वारा शिकार बनाए जाने की घटना का भी जिक्र किया। उन्होनें कहा कि विरोध के नाम पर बच्चों की स्कूल बस को निशाना बनाया जा रहा है तो यह कैसा विरोध है। उन्होंने कहा कि मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता किसी करणी सेना से। कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार का काम है और जो मुख्यमंत्री ऐसा नहीं कर पा रहे है, उन्हें पद पर नहीं रहना चाहिए।