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World Environment Day 2019: वक्त के साथ क्या-क्या बदलाव आए दुनिया में, आगे क्या हैं खतरे

Wed, 05 Jun 2019 09:09 AM IST
शिल्पा ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Wed, 05 Jun 2019 09:09 AM IST
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World Environment Day 2019: Different changes in environment due to global warming
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : File Photo

दुनियाभर में हर साल विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को मनाया जाता है। इस दिन हर साल पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और विकास का संकल्प लिया जाता है। लेकिन इनपर उतना अमल नहीं किया जाता जितना किया जाना चाहिए। 

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आज के समय में जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, तापीय प्रदूषण, विकरणीय प्रदूषण, औद्योगिक प्रदूषण, समुद्रीय प्रदूषण, रेडियोधर्मी प्रदूषण, नगरीय प्रदूषण, प्रदूषित नदियां,  जलवायु बदलाव, और ग्लोबल वार्मिंग का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसी हालत में हमें इतिहास की चेतावनी ही पर्यावरण दिवस का संदेश देती है। चलिए जानते हैं कि पर्यावरण को पहुंचाए जा रहे नुकसान से दुनिया में क्या बदलाव आए हैं और इससे आगे चलकर क्या खतरे हो सकते हैं-

बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग

World Environment Day 2019: Different changes in environment due to global warming
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : File Photo
दुनिया के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही ग्लोबल वार्मिंग बीते 100 सालों में कम होने की बजाय लगातार बढ़ती जा रही है। नासा की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि साल 2018 में ग्लोबल वार्मिंग ने लगातार नया रिकॉर्ड कायम किया है। 



अध्ययन में सामने आया है कि बीते 100 सालों के बीच चाहे जितने भी प्रयास क्यों न किए गए हों, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग में कोई कमी नहीं आई है। 
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बढ़ता तापमान

World Environment Day 2019: Different changes in environment due to global warming
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
अध्ययन में पता चला है कि 19वीं शाताब्दी के बाद से सतह के औसत तापमान में 2 डिग्री फारेनहाइट की वृद्धि हुई है। वहीं बीते 35 सालों में सतह की गर्माहट भी बढ़ी है, जिसका सीधा असर मौसम में हो रहे बदलाव के तौर पर देखा जा सकता है। माना जा रहा है कि साल 2100 तक दुनिया के औसत तापमान में डेढ़ से छह डिग्री तक की वृद्धि होगी। जो इस वक्त 15 डिग्री सेंटीग्रेड है।

बढ़ रहा है जलस्तर

World Environment Day 2019: Different changes in environment due to global warming
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : File photo
बढ़ते तापमान के कारण हिमखंड पिघल रहे हैं, जिससे समुद्री जल स्तर बढ़ता जा रहा है। इससे बाढ़ का खतरा तो बढ़ ही रहा है साथ ही समुद्री पानी भी गर्म हो रहा है। जो समुद्री जीवों के लिए जानलेवा है। ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर ऐसे ही समुद्री जल का स्तर बढ़ता रहा तो इस शाताब्दी तक दुनियाभर में सागरों का जल 30 सेंटीमीटर तक ऊपर आ सकता है। 

खोजकर्ताओं ने पाया कि साल 1870 से 2004 के बीच समुद्री जल के स्तर में 19.5 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। आने वाले 50 सालों में ये गति और अधिक बढ़ जाएगी। बता दें इस अध्ययन के निष्कर्षों को विज्ञान जर्नल जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित किया गया है। वहीं इससे जुड़ा एक चौंकाने वाला खुलासा अंतर्देशीय पैनल की एक रिपोर्ट में किया गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 1990 से 2100 के बीच समुद्री जल का स्तर 9 सेंटीमीटर से 88 सेंटीमीटर के बीच बढ़ सकता है। 
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द्वीपों के डूबने का खतरा बढ़ा

World Environment Day 2019: Different changes in environment due to global warming
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : File Photo
समुद्र के बढ़ते जल स्तर का खतरा केवल बाढ़ आने तक ही सीमित नहीं रहेगा। बल्कि इससे द्वीपों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा। जल का स्तर बढ़ने से जमीन के लगातार डूबते जाने का खतरा होगा। इसके अलावा तटीय क्षेत्रों में पानी का खारापन भी बढ़ जाएगा। जो तटीय भूमि, तटीय जैव संपदा और वहां के पारिस्थितिकी तंत्र को बिगाड़ सकता है। जिसके कारण लोगों को अपना आवास मजबूरन छोड़ना पड़ेगा।
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