उत्तराखंड का ताज किसके सिर पर विराजमान हुआ इसका फैसला आ गया है। विधानसभा की 70 सीटों के परिणाम आ चुके हैं। इसके साथ ही करीब सवा 49 लाख मतदाताओं के मन की बात सामने आ गई है। रिजल्ट सामने आते ही यह भी तय हो गया कि अबकी किसकी होली रंगीन होगी तो किसकी फीकी होगी। आइए नजर डालते हैं किसने मारी बाजी और किसकी हुई हार।
सीएम हरीश रावत
सीएम हरीश खुद शाह मात के खेल में फंसे हैं। खुद को खांटी पहाड़ी कहने वाले हरीश रावत मैदानी क्षेत्र की दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ रहे थे। हरीश रावत के राजनीतिक कौशल से कांग्रेस मुकाबले में तो थे लेकिन सत्ता वापसी की चुनौती के अलावा अपने गढ़ कुमाऊं में खुद को साबित करने की परीक्षा में भी वो फेल हो गए हैं।
उत्तराखंड चुनाव के नतीजे घोषित, कुछ दिग्गजों की हुई जीत तो कुछ ने खाई मात
इंदिरा हृदयेश
कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदेश कांग्रेस ही नहीं राज्य में अकेली महिला राजनीतिज्ञ है जो अपने दम पर सियासत करती है और अपनी चुनाव में अपनी जीत दर्ज कर उन्होंने इस बात को सच साबित कर दिया है।
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प्रीतम सिंह
जनजाति बाहुल्य सीट चकराता प्रीतम सिंह की परंपरागत सीट मानी जाती है। वह पिछले दो दशक से लगातार विधायक है। प्रीतम सिंह के सामने मधु चौहान भाजपा के टिकट पर मैदान में थे और उन्होंने एकबार फिर जीत का मुकाम हासिल किया है।
उत्तराखंड चुनाव के नतीजे घोषित, कुछ दिग्गजों की हुई जीत तो कुछ ने खाई मात
सौरभ बहुगुणा
पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के साथ भाजपा में आये नौ क्षत्रपों को जिताना उनकी जवाबदेही में शामिल हो गया था। बहुगुणा पर अपनी राजनीतिक विरासत को सितारगंज से बेटे सौरभ बहुगुणा की जीत दिलवा कर आगे बढ़ाने का दबाव भी था और सौरभी ने इस चुनावी महासंग्राम में जीत दर्ज की है।
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सतपाल महाराज
केंद्र की राजनीति छोड़ प्रदेश की सियासत में कूदे पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री सतपाल महाराज की भूमिका इस चुनाव से तय होनी थी। सीएम की रेस में आगे माने जा रहे महाराज को चौबट्टाखाल से जीतने का दबाव था और उन्होंने आखिरकार जीत हासिल की।