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कला संसार को कारोबार से जोड़ने की अनूठी पहल, वाद्ययंत्र बनाने वालों को मिलेगा मंच

Mon, 04 Nov 2019 10:10 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: योगेश साहू Updated Mon, 04 Nov 2019 10:10 AM IST
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Unique initiative to connect art world with business, instrument makers will get platform
सूफी गायिका सोनम कालरा - फोटो : Amar Ujala

भारत के मौजूदा संदर्भ में आज कला को कारोबार से जोड़ने की आवश्यकता है। भारतीय संस्कृति में जीवन के हर रंग को कला ने प्रभावित किया है इसलिए कला को आज उद्यम से अलग करके नहीं देखा जा सकता। यह बात नेशनल स्माल इंडस्ट्रीज कार्पोरेशन के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर राम मोहन मिश्रा ने दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में कही।

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इंटरनेशनल मेलोडी फाउंडेशन ने मंत्रालय के सहयोग से इस कार्यक्रम को आयोजित किया था। इस दौरान सूफी गायिका सोनम कालरा ने भी प्रस्तुति दी। इस मौके पर एमएसएमई के सचिव डॉक्टर एके पांडा ने इस अनूठी पहल की सराहना की। बता दें कि भारत में ऐसे आयोजनों की अवधारणा राममोहन मिश्रा ने विकसित की है। इसमें कला और कारोबार के अंतर्निहित रिश्तों को सार्वजनिक मंच दिया जाता है।

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फाउंडेशन के महासचिव डॉक्टर हरीश भल्ला ने इसकी जरूरत बताते हुए कहा कि दरअसल हिंदुस्तान में कला और कारोबार का रिश्ता सदियों से रहा है। यह इस देश में देह और आत्मा जैसे संबंध की तरह है। तभी तो ढोलक बनाने वाला खुद भी अच्छी ढोलक बजाता है, मृदंग और तबला बनाने वाला उन्हें बजाकर दिखाता है। यही हाल सारंगी, डफली, हारमोनियम, मंजीरे, खड़ताल, जल तरंग, बांसुरी और मटकी बजाने वालों का है।

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उन्होंने कहा कि इन संगीत के उपकरणों को दिल के तारों से जोड़कर लोगों को सम्मोहित कर देने वाले कलाकारों को तो सारी दुनिया जानती है, लेकिन उन कला-शिल्पियों को कौन जानता है, जो कलाकारों के लिए इन वाद्ययंत्रों का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि यह ठीक वैसे ही है जैसे हम खादी के कपड़े, हथकरघे के दुशाले, शॉल, हस्त शिल्प, लौह शिल्प, काष्ठ शिल्प को कला से तो जोड़ देते हैं लेकिन उन सैकड़ों अनाम शिल्पकारों को याद नहीं रखते।
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डॉक्टर पांडा ने कहा कि ऐसे कलाकारों को अब नेपथ्य में नहीं, मंच पर लाने की आवश्यकता है। फाउंडेशन के कार्यकारी अध्यक्ष और फिल्मकार राजेश बादल ने मौजूदा माहौल में सूफी भावना का महत्व बताया। उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों को समूचे देश में विस्तार देने की जरूरत पर जोर दिया। फाउंडेशन की कार्यक्रम निदेशक पलक आहूजा और संयुक्त सचिव पूजा जैन ने समन्वय और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाली।
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