देश की सबसे तेज रफ्तार ट्रेन कही जा रही टेल्गो का बहुप्रतीक्षित ट्रायल शनिवार को सफल रहा। ट्रेन 12:40 बजे मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन से रवाना हुई। मथुरा से पलवल तक का 84 किमी का सफर ट्रेन ने 55 मिनट में पूरा किया। रफ्तार रही 120 किमी प्रति घंटा। बाद में मथुरा जंक्शन से रूंधी रेलवे स्टेशन तक 130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से एक और ट्रायल किया गया। मथुरा में एक महीने तक ट्रेन का ट्रायल होगा। अधिकतम रफ्तार तक पहुंचने तक प्रति दिन दस किमी प्रति घंटा रफ्तार बढ़ाई जाएगी।
टेल्गो ने 84 किलोमीटर का सफर 55 मिनट में किया पूरा, लोगों को किया आकर्षित
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मथुरा से पलवल मार्ग पर टेल्गो के ट्रायल का वक्त 11 बजे तय था। दस बजे तक इंजीनियरिंग स्टाफ यहां पहुंच गया। चेकिंग के बाद टेल्गो के ट्रायल की अनुमति दी गई। इसी बीच रेलवे मुख्यालय बड़ौदा हाउस से कहा गया कि फिलहाल कुछ एक्सप्रेस इस रूट से गुजरेंगी लिहाजा इनके जाने के बाद ट्रायल शुरू किया जाए। 12:40 पर ट्रेन को मथुरा जंक्शन से रवाना किया गया। ट्रेन में डीजल इंजन लगाया गया था।
लोको पायलट सुजीत पाठक और विवेक शर्मा ने टेल्गो को चलाया। टेल्गो ठीक 1:35 बजे पलवल रेलवे स्टेशन पर पहुंची। पलवल से इसे 2 बजे चलाया गया और 3:12 बजे ये मथुरा जंक्शन पर पहुंची। दूसरे ट्रायल में 3:57 बजे पर टेल्गो मथुरा से रवाना हुई। यहां रफ्तार बढ़कर 130 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई। इस बार पलवल से करीब 12 किमी पहले रूंधी स्टेशन तक ही इसे चलाया गया। इस स्टेशन पर ट्रेन 4:40 बजे पहुंची।
स्पेन से आए दस इंजीनियरों ने ट्रायल के पल-पल पर नजर रखी। इंजीनियरों ने बताया कि किसी प्रकार की कोई तकनीकी खामी नहीं आई है। पहला ट्रायल पूरी तरह से सफल बताया जा रहा है।
टेल्गो ट्रेन में नौ कोच लगाए गए थे। इनमें दो कोच प्रथम श्रेणी के थे। प्रत्येक में 18-18 यात्री सीट हैं। द्वितीय श्रेणी के चार कोच में से प्रत्येक में 36-36 सीट लगी हैं। इसके साथ एक कोच में पैंट्री कार, एक जनरेटर रूम और एक अंतिम कोच गार्ड रूम रहा। इस तरह प्रथम ट्रायल में टेल्गो ट्रेन नौ कोच के साथ चली।