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Sharad Yadav: नीतीश से रिश्ते इतने बिगड़े कि छोड़ना पड़ा 22 साल पुराना बंगला, जानें शरद यादव से जुड़ी 10 बातें

Fri, 13 Jan 2023 02:12 PM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Fri, 13 Jan 2023 02:12 PM IST
सार

शरद का जन्म मध्य प्रदेश में हुआ था, लेकिन उनकी ज्यादातर राजनीति बिहार में हुई। शरद पहले ऐसे राजनीतिक शख्स रहे, जो तीन अलग-अलग राज्यों से संसद पहुंचे। एक समय ऐसा भी आया, जब शरद यादव से बंगला तक छीन लिया गया था। आइए जानते हैं शरद यादव से जुड़ी 10 रोचक बातें... 
 

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Sharad Yadav: Relations with Nitish deteriorated so much that he had to leave the 22-year-old bungalow
शरद यादव - फोटो : अमर उजाला
जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव ने गुरुवार रात फोर्टिस अस्पताल में आखिरी सांस ली। 75 साल के शरद यादव लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। गुरुवार रात सांस लेने में दिक्कत हुई तो परिवार के सदस्यों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। जहां, इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। 


शरद का जन्म मध्य प्रदेश में हुआ था, लेकिन उनकी ज्यादातर राजनीति बिहार में हुई। शरद पहले ऐसे राजनीतिक शख्स रहे, जो तीन अलग-अलग राज्यों से संसद पहुंचे। एक समय ऐसा भी आया, जब शरद यादव से बंगला तक छीन लिया गया था। आइए जानते हैं शरद यादव से जुड़ी 10 रोचक बातें... 
 
Sharad Yadav: Relations with Nitish deteriorated so much that he had to leave the 22-year-old bungalow
1. मध्य प्रदेश के किसान परिवार में हुआ जन्म
शरद यादव का जन्म मध्य प्रदेश के होशंगाबाद के बाबई गांव में हुआ था। एक जुलाई 1947 को जन्मे शरद यादव के पिता नंद किशोर यादव किसान थे और मां सुमित्रा यादव गृहिणी। शरद के बड़े भाई रविशंकर यादव थे। नौ अप्रैल 2017 को रविशंकर यादव का निधन हो गया था। 
 
Sharad Yadav: Relations with Nitish deteriorated so much that he had to leave the 22-year-old bungalow
2. गांव से पढ़े, फिर इंजीनियरिंग की
शरद यादव की प्रारंभिक शिक्षा होशंगाबाद से ही हुई। इसके बाद उन्होंने इटारसी के हायर सेकेंडरी स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। साल 1964 में जबलपुर के साइंस कॉलेज से बीएससी और साल 1970 में कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग जबलपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई में उन्हें गोल्ड मेडल भी मिला था। 
 
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3. छात्र राजनीति से बनाई पहचान
साल 1971 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान शरद राजनीति से जुड़ गए थे। इस दौरान उन्होंने जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। जब शरद यादव छात्र राजनीति में मशगूल थे तब देश में लोकनायक जय प्रकाश नारायण के लोकतंत्र वाद और डॉ. राम मनोहर लोहिया के समाजवाद की क्रांति की लहरें परवान चढ़ रहीं थीं। शरद यादव भी इनसे खासे प्रभावित हुए। डॉ. लोहिया के समाजवादी विचारों से प्रेरित होकर शरद ने अपने मुख्य राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। युवा नेता के तौर पर सक्रियता से कई आंदोलनों में भाग लिया और आपातकाल के दौरान मीसा बंदी बनकर जेल भी गए।  
 
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4. 1974 में पहली बार सासंद चुने गए
शरद यादव पहली बार साल 1974 में मध्य प्रदेश की जबलपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। तब वह महज 27 साल के थे। शरद ने उस दौरान कांग्रेस के दिग्गज नेता गोविंद दास को चुनाव हराया था। 1984 में वह अमेठी लोकसभा सीट से तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ चुनाव लड़े। 
 
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