भारत के फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का समझौता अब अंतिम चरण में प्रवेश कर गया है। दोनों देशों ने इस डील के आडे़ आ रहे कीमतों के मुद्दे पर अपने मतभेदों को तकरीबन सुलझा लिया है। डील की दिशा में यह प्रगति बीते साल पेरिस दौरे के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बीच 36 राफेल खरीदे जाने पर बनी सहमति के चार महीने बाद हुई है। डील के तहत फ्रांस आठ अरब यूरो (करीब 59 हजार करोड़ रुपये) में भारत को 36 राफेल लड़ाकू विमान देगा। पहले इन विमानों की कीमत 11 अरब यूरो रखी गई थी। तो आइए जानते हैं क्या है रॉफेल लड़ाकू विमानों की खासियत।
फ्रांस का मुख्य लड़ाकू विमान
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रॉफेल का मतलब होता है हवा का झोंका
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रॉफेल एक फेंच शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ 'हवा का झोंका' होता है। यह लड़ाकू विमान अपने नाम के मुताबिक ही काम भी करता है। रॉफेल एक मल्टीरोल फाइटर जेट है जो दुश्मनों के दांत खट्टे करने में कोई कसर नहीं छोड़ता। यह फ्रांस का मुख्य लड़ाकू विमान है जिसे अब भारतीय वायु सेना में भी शामिल किया जाएगा।
परमाणु प्रतिरोध मिशन को अंजाम देने में सक्षम
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डेल्टा विंग की वजह से मिलता है ज्यादा लिफ्ट
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डेल्टा विंग वाला रॉफेल विमान अपने हवाई वर्चस्व के लिए जाना जाता है जो हवाई टोही, ग्राउंड सपोर्ट, इन-डेप्थ स्ट्राइक, एंटी शिप स्ट्राइक और परमाणु प्रतिरोध मिशन को अंजाम देने में सक्षम है। रॉफेल विमान का निर्माण करने वाली डसॉल्ट कंपनी ने इसे 'ऑम्नीरोल' एयरक्रॉफ्ट का नाम दिया है।
स्निक्मा एम88 इंजन का होता है इस्तेमाल
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सिंगल इंजन के बावजूद मिलती है जबरदस्त ताकत
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इंजन- रॉफेल विमानों में अत्याधुनिक स्निक्मा एम88 सिंगल इंजन का इस्तेमाल किया जाता है जो 11,250 पाउंड का ड्राईथ्रस्ट और आफ्टरबर्नर्स के साथ करीब 17,000 पाउंड का थ्रस्ट पैदा करती है। यह इंजन विमान को इतनी ताकत देती हैं कि जिससे यह चार मिसाइलों और एक ड्रॉप टैंक का भार आसानी से उठा सके।
इसका डिजाइन है कुछ खास
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पलक झपकते हो जाता है गायब
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इसके साथ रॉफेल के इंजन को कुछ इस हिसाब से डिजाइन किया गया है जिससे की यह दुश्मनों के रडार पर आसानी से न आ पाए। साथ ही इसके इंफ्रारेड इमिशन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।