एनडीए की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनाई गईं द्रौपदी मुर्मू ने चुनाव जीत लिया है। मुर्मू ने यशवंत सिन्हा के खिलाफ पहले जताए गए अनुमानों के मुताबिक ही बड़े अंतर से हरा दिया। इस चुनाव में जीत का अंतर प्रत्याशी के पीछे सरकार की ताकत को भी दिखाते हैं।
ऐसे में पिछले 70 वर्षों में हुए राष्ट्रपति चुनावों के जरिए जानते हैं कि आखिर कब-कब इस पद के लिए होने वाले चुनाव एकतरफा हो गए और कब इनके लिए सरकार को अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी है? और कब सत्ताधारी दल का उम्मीदवार हार गया?
1. 2022: द्रौपदी मुर्मू vs यशवंत सिन्हा
इस साल का राष्ट्रपति चुनाव काफी दिलचस्प रहा है। जहां भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने इस चुनाव में महिला आदिवासी उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार बनाया। वहीं, विपक्ष की तरफ से यशवंत सिन्हा को प्रत्याशी बनाया गया। इस चुनाव में अलग-अलग राज्यों में भाजपा का विपक्ष कही जाने वाली कुछ पार्टियों ने भी मुर्मू को समर्थन का एलान किया। इनमें आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस, ओडिशा की बीजू जनता दल, झारखंड की झारखंड मुक्ति मोर्चा और महाराष्ट्र की शिवसेना शामिल रहीं। उधर यशवंत सिन्हा खुद बंगाल में चुनाव प्रचार करने नहीं गए। राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे भी उम्मीद के मुताबिक ही रहे। जहां द्रौपदी मुर्मू करीब 64 फीसदी वोट हासिल करने में कामयाब रहीं, वहीं यशवंत सिन्हा 36 फीसदी वोट ही हासिल कर पाए। द्रौपदी मुर्मू को कुल 2824 वोट मिले। इन मतों का मूल्य 6,76,803 रहा है। वहीं, यशवंत सिन्हा को कुल 1,877 वोट्स मिले। इन मतों का मूल्य 3,80,177 है।
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राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार मीरा कुमार और रामनाथ कोविंद (फाइल फोटो)
2. 2017: रामनाथ कोविंद vs मीरा कुमार
पिछला राष्ट्रपति चुनाव 2017 में हुआ था। मोदी सरकार की तरफ से इस चुनाव में रामनाथ कोविंद उम्मीदवार थे, जबकि विपक्ष ने लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार को उतारा था। मीरा कुमार के पास 17 विपक्षी दलों का समर्थन था। इनमें समाजवादी पार्टी और बसपा भी शामिल रहीं।बिहार में राजद की साथी पार्टी रही जदयू ने सभी को चौंकाया और रामनाथ कोविंद का समर्थन किया। कोविंद को 7 लाख 2 हजार 44 वैल्यू के वोट मिले, वहीं मीरा कुमार को 3 लाख 67 हजार 314 वोट मिले। कोविंद 65.65 फीसदी वोट हासिल कर जीतने में सफल रहे।
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2012 के चुनाव में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे प्रणब मुखर्जी और पीेए संगमा।
- फोटो : Social Media
3. 2012: प्रणब मुखर्जी vs पीए संगमा
इस चुनाव में यूपीए-2 सरकार के उम्मीदवार रहे प्रणब मुखर्जी जीते। उन्हें विपक्ष के पीए संगमा के खिलाफ लगभग 70 फीसदी वोट मिले। जहां प्रणब मुखर्जी को 7 लाख 13 हजार 763 मत प्राप्त हुए, वहीं पीए संगमा को 3,15,987 वोट मिले थे।
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2007 के राष्ट्रपति चुनाव में प्रत्याशी रहीं प्रतिभा पाटिल और भैरो सिंह शेखावत।
- फोटो : Social Media
4. 2007: प्रतिभा पाटिल vs भैरो सिंह शेखावत
2007 में भारत को पहली महिला राष्ट्रपति मिली थीं। तब कांग्रेस और लेफ्ट पार्टी के समर्थन से प्रतिभा पाटिल ने भाजपा उम्मीदवार भैरो सिंह शेखावत को हराया था। जहां प्रतिभा पाटिल को 6,38,116 वैल्यू के वोट मिले, वहीं शेखावत को 3,31,306 मत मिले थे। इस चुनाव में भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने प्रतिभा पाटिल को समर्थन दिया था।