प्रधानमंत्री मोदी का लद्दाख दौरा, दुनिया को दिया भारत की ताकत का संदेश, देखिए तस्वीरें
15 जून की रात को पूर्वी लद्दाख में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प के कुछ ही दिनों बाद प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को अचानक लेह पहुंचे। जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री सुबह करीब साढ़े नौ बजे लेह पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित निमू में थल सेना, वायु सेना और इंडो-तिब्बत सुरक्षा बल (आईटीबीपी) के जवानों से बातचीत की। इसके साथ ही उन्होंने सीमा की स्थिति का भी जायजा लिया।
अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने चीन को भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विस्तारवाद का युग समाप्त हो चुका है, यह युग विकासवाद का है। पूरी दुनिया ने इसके खिलाफ मन बना लिया है। इतिहास में विस्तारवाद ने ही मानवता का सबसे ज्यादा अहित किया है। उन्होंने कहा कि विस्तारवाद की जिद किसी पर सवार हो जाती है तो उसने हमेशा विश्व शांति के सामने खतरा पैदा किया है। इतिहास गवाह है कि ऐसी ताकतें मिट गई हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत शांति और मित्रता के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन शांति के लिए इस प्रतिबद्धता को भारत की कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कमजोर कभी शांति की पहल नहीं कर सकता और वीरता ही शांति की पूर्व शर्त होती है। उन्होंने कहा, लद्दाख का ये पूरा हिस्सा भारत का मस्तक है। 130 करोड़ भारतीयों के मान सम्मान का प्रतीक है। यह भूमि भारत के लिए सर्वस्व त्याग करने के लिए हमेशा तैयार रहने वाले राष्ट्रभक्तों की धरती है।
गलवां घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने सैनिकों से कहा, आपने और आपके साथियों ने जो वीरता दिखाई है, उसने पूरी दुनिया में यह संदेश दिया है कि भारत की ताकत क्या है। उन्होंने कहा कि देश के वीर सपूतों ने गलवां घाटी में जो अदम्य साहस दिखाया है वह पराक्रम की पराकाष्ठा है, देश को आप पर गर्व है। बता दें कि इस झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। वहीं, चीन ने अभी तक अपने नुकसान की कोई जानकारी नहीं दी है।