आज पूरा देश राममय है और देश में दशहरा उत्सव पूरे हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। विभिन्न रामलीला उत्सवों में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी भी नवश्री धार्मिक लीला कमेटी की रामलीला में शामिल हुईं। विजयदशमी के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में दशहरा उत्सव में हिस्सा लिया। वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारका में आयोजित रामलीला में शामिल हुईं।
द्वारका सेक्टर-10 में द्वारका श्री रामलीला सोसायटी की 15वीं रामलीला के रावण दहन कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने 221 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया। आयोजन के लिए मंच को सोमनाथ मंदिर की थीम पर सजाया गया है।
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दशहरा कार्यक्रम में पीएम मोदी
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विजयदशमी के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में दशहरा समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम, माता जानकी और बजरंगबली के चरणों में नमन करते हुए देशवासियों को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आज भारत के हर कोने, गांव और शहर में भगवान श्रीराम की भक्ति और उनके आदर्शों की गूंज सुनाई दे रही है तथा पूरा देश रामलीला के उत्साह में डूबा हुआ है।
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दशहरा 2026
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प्रधानमंत्री मोदी ने रामलीला समारोह में अपने संबोधन के दौरान कहा, देशभर में रामलीलाओं का मंचन, प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवंत रखने की परंपरा, अत्याचार और आतंक के अंत का उद्घोष और असत्य पर सत्य सनातन की विजय का विश्वास, हमारे लिए ये केवल त्योहार नहीं हैं, ये भारत की प्राण ऊर्जा हैं। इसलिए आज जब देश का जन-जन अधर्म पर धर्म की विजय का उद्घोष कर रहा है तो फिर सियावर रामचंद्र का जयकारा लगाते हैं। इस देश ने इसकी संस्कृति और इसके पूर्वजों ने हजारों वर्षों से प्रभु श्रीराम की उपासना की है। ये आस्था केवल इसलिए नहीं है कि श्रीराम ने राक्षसराज रावण का अंत किया, ये आस्था इसलिए भी है कि प्रभु श्रीराम ने हमें ऐसे आदर्श दिए, जो मानवता के इतिहास में अतुलनीय हैं।
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दशहरा 2026
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उन्होंने कहा कि हमेशा जनता को जनार्दन मानकर आगे बढ़ना है। हमें गरीब और वंचित की सेवा को सर्वोपरि रखना है। प्रभुराम के जीवन से हमें बहुत बड़ी सीख मिलती है। संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, चुनौती कितनी भी बड़ी क्यों न हो, हमें दूसरे के भरोसे नहीं बैठना है। हमें अपना सामर्थ्य पहचानना है, अपने संसाधनों पर विश्वास करना है। अपने संकल्प को शक्ति बनाना है और अपने परिश्रम से समाधान निकालना है। प्रभुराम ने हमें सिखाया कि रास्ते की कठिनाइयां हमारी यात्रा को रोक नहीं सकतीं। समुद्र सामने था, लंका दूर थी, लेकिन संकल्प अडिग था इसलिए रामजी ने जनता की सामूहिक शक्ति को जगाया, जनभागीदारी को अपना संबल बनाया, उपलब्ध संसाधनों को जोड़ा और असंभव लगने वाले लक्ष्य को संभव बनाया, यही सफलता का मूलमंत्र है। अपनी शक्ति पर विश्वास, अपने सामर्थ्य पर भरोसा और अपने संसाधनों का सही उपयोग और अपने लक्ष्य के प्रति अटूट संकल्प, आज हमें भी इसी मंत्र को लेकर आगे बढ़ना है।