केरल में निपाह वायरस से अब तक 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 15 पीड़ित लोगों का इलाज जारी है। सरकार ने वायरस से बचने के लिए एडवाइजरी भी जारी कर दी है। लेकिन इस खतरनाक वायरस का खतरा अब केवल केरल तक ही सीमित नहीं है। बल्कि अन्य राज्यों में भी बढ़ गया है। चलिए विस्तार से जानते हैं कि निपाह वायरस के चलते विभिन्न राज्यों की स्थिति कैसी है और सरकार की ओर से वहां क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
केरल
इस वायरस के प्रभाव की खबर सबसे पहले केरल से आई थी। गुरुवार को राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई थी, जिसमें वायरस के निवारण के संबंध में उठाए गए कदमों की समीक्षा की गई। बैठक में वायरस के बारे में जागरूकता बढ़ाने के अलावा सतर्कता रखने और राज्य के निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव की अगुआई वाली एक समिति लगातार स्थिति की निगरानी करेगी। इससे निपटने के लिए 'रिबावायरिन' नामक एक एंटी वायरल दवा बांटी जा रही है। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द दवाइयां पहुंचाएं।
ओडिशा
निपाह वायरस के चलते ओडिशा सरकार ने 5 मेडिकल कॉलेज और 30 जिला मुख्यालय अस्पतालों को सतर्क कर दिया है। चिकित्सकीय प्राधिकारी वर्ग ने स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक ब्राजा किशोर ब्रह्मा को पत्र लिखा है। जिसमें वायरस के खिलाफ निवारण उपायों की जांच करने को कहा गया है। हालांकि इस राज्य में अभी तक इस तरह के किसी भी मामले की सूचना नहीं मिली है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को इससे निपटने के लिए पहले ही सचेत कर दिया है।
पश्चिम बंगाल
निपाह वायरस से बचाव के लिए पश्चिम बंगाल में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। यहां वर्ष 2001 में एक अज्ञात बुखार की वजह से 45 लोगों की मौत हो गई थी। तब पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने निपाह वायरस को उन मौतों की वजह बताया था। उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एक सेवानिवृत डॉक्टर एनबी देवनात का कहना है कि राज्य में निपाह वायरस पहले से मौजूद है। यह एक बेहद संक्रामक और खतरनाक बीमारी है।
गुजरात
निपाह वायरस को लेकर गुजरात सरकार भी सतर्क हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी कलेक्टर और मुख्य स्वास्थ्य अधिकारियों को इस संबंध में सूचना दे दी है। सभी वार्डों में आइसोलेटेड वार्ड तैयार करने व सावधानियां बरतने के निर्देश दिए गए हैं। शंकास्पद रोगी का तत्काल उपचार शुरु करने और उसके बारे में रिपोर्ट पेश करने के भी निर्देश दिए गए हैं।