मुंबई में साल 2008 को लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने दहशत फैलाई थी। आज इस हमले को 10 साल पूरे हो गए हैं। आतंकवादियों ने ताज और ट्राइडेंट होटल के साथ ही छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर हमला किया था। इस हमले में 166 लोगों की मौत हो गई थी। मगर देश के बहादुर जवानों और पुलिसकर्मियों ने आतंक के दहशतगर्दों का डटकर सामना किया और कई बेगुनाहों की जान बचाई थी। हालांकि 5 बहादुरों को इस हमले में अपनी जान गंवानी पड़ी थी। आज हम आपको उन्हीं वीरों के बारे में बताते हैं।
हेमंत करकरे- हेमंत करकरे मुंबई एटीएस के मुखिया थे। वह रात के समय खाना खा रहे थे तभी उन्हें क्राइम ब्रांच से आतंकी हमला होने का फोन आया। वह अपने घर से निकले और एसीपी अशोक काम्टे, इंस्पेक्टर विजय सालस्कर के साथ मोर्चा संभाला। कामा अस्पताल के बाहर मुठभेड़ में आतंकी अजमल कसाब और इस्माइल खान ने उनपर अंधाधुंध गोलियां चला दी और वह शहीद हो गई। मरणोपरांत उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।
अशोक काम्टे- काम्टे मुंबई पुलिस में एसीपी के पद पर तैनात थे। आतंकी हमले के समय वह एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे की टीम का हिस्सा थे। कामा अस्पताल के बाहर मुठभेड़ में आतंकी इस्माइल खान ने उनपर कई राउंड गोलियां चलाईं। जिसमें से एक गोली उनके सिर पर लगी। घायल होने के बावजूद उन्होंने कुछ दुश्मनों को मार गिराया।
विजय सालस्कर- वरिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर सालस्कर का नाम एक समय मुंबई अंडरवर्ल्ड के लिए खौफ का दूसरा नाम हुआ करता था। वह भी एटीएस प्रमुख करकरे की टीम का हिस्सा थे। कामा अस्पताल के बाहर हुई मुठभेड़ में आतंकियों की गोली से वह शहीद हो गए। मरणोपरांत उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।
तुकाराम ओंबले- मुंबई पुलिस के इस एएसआई के हौंसले की जितनी तारफी की जाए उतनी कम है। ओंबले ने न केवल बिना हथियार के आतंकी अजमल कसाब का सामना किया बल्कि आखिर में उसे पकड़ने में कामयाबी भी हासिल की। इस दौरान कसाब ने उनपर कई गोलियां चलाईं जिससे वह शहीद हो गए। मरणोपरांत उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।