बेल्जियम में गिरफ्तार फरार हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका मुंबई की एक अदालत में सात सालों से लंबित है। हालांकि, मेहुल के भतीजे नीरव मोदी को विशेष अदालत पहले ही भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर चुकी है। वह 2019 से लंदन की जेल में बंद है।
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ईडी ने जुलाई, 2018 में याचिका दायर कर मेहुल को भगोड़ा आर्थिक अपराधी (एफईओ) घोषित करने और इस अधिनियम के तहत उसकी संपत्ति जब्त करने की अपील की थी। हालांकि, इस मामले में बार-बार देरी हुई, क्योंकि आरोपियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कई आवेदन दायर किए। इनमें ईडी की याचिका में खामियों का आरोप लगाया गया।
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इस साल फरवरी में सुनवाई फिर स्थगित होने के बाद ईडी के एक अधिकारी ने कहा था कि अदालतों को तुच्छ आवेदनों से व्यस्त रखा जाता है। याचिका पेश होने के बाद अदालत को सुनवाई जारी रखनी चाहिए थी और भविष्य की कार्यवाही पर निर्णय लेना चाहिए था। उन्होंने अदालत से आग्रह किया था कि वह इसी तरह के आवेदन बार-बार दायर किए जाने पर ध्यान दे और उन पर विचार न करे।
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मेहुल चोकसी (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी सुनवाई शुरू नहीं
मेहुल ने ईडी के आवेदन को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और आरोप लगाया था कि एजेंसी ने आवेदन दायर करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया, इसलिए यह दोषपूर्ण है। साथ ही, उसके भारतीय पासपोर्ट के निलंबन के कारण उसके लिए जांच के लिए वापस आना असंभव हो गया है। हालांकि सितंबर, 2023 में हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी व फैसला सुनाया कि ईडी ने एफईओ एक्ट के तहत निर्धारित प्रारूप का पालन किया है। साथ ही, विशेष अदालत की कार्यवाही पर लगी रोक भी हटा दी।
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मेहुल चोकसी।
- फोटो : ANI
इसके बावजूद, मेहुल को एफईओ घोषित करने पर सुनवाई शुरू नहीं हो सकी, क्योंकि चोकसी अपने वकीलों के जरिए विशेष अदालत के समक्ष आवेदन दायर करता रहा। इनमें से ज्यादातर याचिकाएं खारिज कर दी गईं, लेकिन कुछ अभी भी लंबित हैं। ईडी के एफईओ आवेदन पर जारी नोटिस को वापस लेने की याचिका के जरिए कार्यवाही को रोकने का उसकी हालिया कोशिश दिसंबर, 2023 में खारिज कर दी गई थी।