देश की सबसे हाई प्रोफाइल लोकसभा सीट वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वजह से चर्चा का केंद्र बनी हुई है। पीएम मोदी के चुनाव लड़ने के अलावा और भी कई बातों से वाराणसी सुर्खियां बटोर रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़े थे। यहां से इस बार भी कई ऐसे उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, जिनकी वजह से वाराणसी का मुकाबला दिलचस्प हो गया है। आइए जानते हैं इसबार प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कौन-कौन हैं चुनावी मैदान में।
जवान से लेकर किसान तक, वाराणसी से पीएम मोदी के खिलाफ किस-किसने किया मैदान में उतरने का एलान
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पिछले साल बीएसएफ के जवान तेज बहादुर खूब चर्चा में रहे थे। उन्होने जवानों को मिल रहे खाने की खराब क्वालिटी को लेकर एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किया था। बाद में यादव पर कोर्ट ऑफ इंक्वयारी बैठी जिसमें उनके लगाए आरोप गलत साबित हए। उन्हें दोषी पाया गया और नौकरी से निकाल दिया गया। तेज बहादुर वाराणसी से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। तेज बहादुर ने कहा कि चुनाव लड़ने के अलावा उनके पास कोई रास्ता अब नहीं बचा है।
वाराणसी से प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ तमिलनाडु के 111 किसान भी अपने मुद्दों को लेकर चुनावी मैदान में उतरेंगे। इन किसानों का नेतृत्व पी अय्यकनू कर रहे हैं। तमिलनाडु के किसानों 2017 में राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर आंदोलन किया था। किसानों ने अलग- अलग तरीके से विरोध कर सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की और खींचने की कोशिश की थी पर वो असफल रहे थे। देश की चर्चित लोकसभा सीट वाराणसी से किसान प्रधानमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़कर अपनी समस्याओं को देश के सामने बताने का प्रयास करेंगे।
दलित नेता के तौर पर तेजी से उभरे भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ सबसे चर्चित चेहरा हैं। चंद्रशेखर ने कुछ दिन पहले वाराणसी में आयोजित रोड शो में मोदी को हराने का दावा किया था। चंद्रशेखर अपने आक्रामक भाषणों से अपने समुदाय के युवाओं में अच्छी पैठ बना चुके हैं। पिछले दिनों पुलिस की लाठीचार्ज में घायल होने पर अस्पताल में भर्ती होने के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उनसे मुलाकात की थी। तभी उन्होंने एलान किया था कि वह वाराणसी जाकर पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे।
चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए वाराणसी से चुनाव लड़ने का एलान किया है। कर्णन देश के पहले ऐसे जज हैं, जिन्हे सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में अवमानना का दोषी करार दिया था। कर्णन को छह महीने जेल में भी काटने पड़े थे। पूर्व जज ने 2018 में एंटी-करप्शन डायनैममिक पार्टी बनाई थी।