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कावेरी जल विवाद: कर्नाटक ने तमिलनाडु को छोड़ा तय मात्रा से ज्यादा पानी, सुप्रीम कोर्ट में क्यों पहुंचा मामला?
Mon, 31 Aug 2026 05:19 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Mon, 31 Aug 2026 05:19 PM IST
सार
कावेरी नदी के पानी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। तमिलनाडु ने अपने हिस्से का पानी तुरंत छोड़ने की मांग की थी। सुनवाई में कर्नाटक ने कहा कि वह कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के 9000 क्यूसेक पानी छोड़ने के निर्देश का पालन कर रहा है और तय मात्रा से ज्यादा पानी छोड़ा गया है। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं...
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तमिलनाडु-कर्नाटक के बीच कावेरी विवाद।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कावेरी जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच चल रहे विवाद पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कर्नाटक सरकार ने अदालत को बताया कि 31 अगस्त तक तमिलनाडु के लिए तय मात्रा से ज्यादा पानी छोड़ा जा चुका है। राज्य ने कहा कि वह कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के उस निर्देश का पालन कर रहा है, जिसमें 15 दिनों तक रोजाना 9,000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा गया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को तय की है। अदालत ने दोनों पक्षों को तब तक पानी छोड़ने और जल स्थिति से जुड़े नए आंकड़े रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति दी है। कावेरी जल विनियमन समिति की 15-15 दिन में होने वाली समीक्षा भी आगे जारी रहेगी। ऐसे में अगली सुनवाई में दोनों राज्यों के ताजा आंकड़ों और पानी के बकाये का मुद्दा अहम हो सकता है।
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कर्नाटक ने कितना पानी छोड़ा और सुप्रीम कोर्ट को क्या बताया?
कर्नाटक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने बताया कि 25 अगस्त के निर्देश के अनुसार रोजाना 9,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाना था। उन्होंने कहा कि पहले दिन कर्नाटक ने 10,727 क्यूसेक पानी छोड़ा। 30 अगस्त को 9,888 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि 31 अगस्त सुबह आठ बजे तक 11,547 क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका था। कर्नाटक ने अदालत में कहा कि वह तय मात्रा से ज्यादा पानी छोड़ रहा है।
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तमिलनाडु की शिकायत क्या है?
तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि राज्य ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के सामने पानी के पुराने बकाये का मुद्दा उठाया था, लेकिन इस पर कोई निर्देश नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि इससे पहले कर्नाटक को 12 अगस्त से 15 दिनों तक रोजाना 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा गया था। अब यह मात्रा घटाकर 9,000 क्यूसेक कर दी गई है। तमिलनाडु का कहना है कि बारिश कम होने वाले साल में उसे उसका उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों से क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर तमिलनाडु को पानी चाहिए तो कर्नाटक पानी छोड़ रहा है। अदालत ने यह भी कहा कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के फैसले को चुनौती दी जानी चाहिए। अदालत को बताया गया कि कावेरी जल विनियमन समिति हर 15 दिन में स्थिति की समीक्षा कर रही है और संबंधित पक्षों को सुनने के बाद जरूरी आदेश जारी कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से ताजा आंकड़े रिकॉर्ड पर रखने को कहा है।कर्नाटक ने सूखे का मुद्दा क्यों उठाया?
कर्नाटक की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य के कुछ इलाकों में गंभीर सूखा घोषित किया गया है और इनमें कावेरी नदी बेसिन के जिले भी शामिल हैं। वहीं, तमिलनाडु ने अपने पुराने पानी के बकाये को पूरा करने की मांग रखी। इससे विवाद केवल मौजूदा पानी छोड़ने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पिछले बकाये और दोनों राज्यों की मौजूदा जल स्थिति भी महत्वपूर्ण हो गई है।कावेरी विवाद इस बार सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा?
तमिलनाडु सरकार ने तीन अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। राज्य ने आरोप लगाया था कि उसे कावेरी जल विनियमन समिति की ओर से तय मात्रा और कर्नाटक से छोड़ा जा रहा पानी दोनों ही कम मिल रहे हैं। इससे पहले 28 जुलाई को समिति ने कर्नाटक को 29 जुलाई से 15 दिनों तक रोजाना 3500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। बाद में 12 अगस्त से रोजाना 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया, जिसे कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने भी बरकरार रखा।सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को तय की है। अदालत ने दोनों पक्षों को तब तक पानी छोड़ने और जल स्थिति से जुड़े नए आंकड़े रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति दी है। कावेरी जल विनियमन समिति की 15-15 दिन में होने वाली समीक्षा भी आगे जारी रहेगी। ऐसे में अगली सुनवाई में दोनों राज्यों के ताजा आंकड़ों और पानी के बकाये का मुद्दा अहम हो सकता है।