लोकसभा चुनाव की घोषणा होते ही देश भर में नेताओं ने अपनी सियासी सेहत को बेहतर रखने के लिए दल बदल कार्यक्रम शुरू कर दिया था। इस दौरान कई नेताओं की घर वापसी हुई तो कइयों ने दल बदल लिया। हालांकि नतीजों के बाद यह साफ हो गया कि ये जोड़-तोड़ का गणित किसके लिए फायदे का सौदा साबित हुआ और कौन हाथ मलता रह गया। आइए देखते हैं, दलबदलू नेताओं का आखिर क्या हुआ-
चुनावी नतीजों में दलबदलू नेताओं के दिन फिरे या मुंह की खानी पड़ी, जानिए सबका हाल
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शत्रुघ्न सिन्हा
कभी भाजपा के टिकट पर लोकसभा सांसद रहे शत्रुघ्न सिन्हा ने इस बार टिकट कट जाने के कारण पार्टी से नाराज होकर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। वो कांग्रेस के टिकट पर पटना साहिब लोकसभा सीट से मैदान में तो उतर गए, मगर भाजपा के दिग्गज रवि शंकर प्रसाद ने उन्हें घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। रवि शंकर प्रसाद ने उन्हें करीब तीन लाख वोटों से हरा कर जीत हासिल की।
सुजय विखे पाटिल
महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल के बेटे सुजय विखे पाटिल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस के उम्मीदवार संग्राम अरुणकाका जगताप को करीब तीन लाख वोटों से हरा कर जीत हासिल की।
तृणमूल कांग्रेस को छोड़ भाजपा में शामिल हुए सौमित्र खान के लिए भी अपनी पुरानी पार्टी से नाता तोड़ना फायदेमंद रहा। उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार श्यामलाल को 78 हजार वोटों से हरा कर पश्चिम बंगाल की बिष्णुपुर लोकसभा सीट पर अपना झंडा फहराया।
बहराइच लोकसभा सीट से भाजपा सांसद रहते हुए ही सावित्री बाई फुले ने भाजपा छोड़ कर कांग्रेस का हाथ पकड़ लिया था। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें यहां से मैदान में उतारा, लेकिन सावित्री बाई को ऐसी हार का सामना करना पड़ा कि महज 34 हजार वोटों के साथ तीसरे नंबर पर चली गईं।