भारत में कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप अभी भी बरकार है लेकिन मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय की एक रिपोर्ट में थोड़ी राहत की खबर आई। इसके मुताबिक देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के 36 हजार 469 नए मामले सामने आए हैं, वहीं 488 लोगों की मौत हो गई। देश में कोरोना वायरस की मृत्यु दर लगातार घट रही है और अब मृत्यु दर 1.5 फीसदी हो गई है, वहीं रिकवरी दर बढ़कर 90.62 फीसदी हो गई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने किया 'नई बीमारी' का जिक्र, बच्चों को है इससे खतरा
प्रेस वार्ता में आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा कि कावासाकी बीमारी एक ऑटो-इम्यून बीमारी है, जो 5 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है और यह भारत में न के बराबर है। मुझे नहीं लगता कि हमें भारत में अब तक कोविड-19 के साथ कावासाकी का कोई मामला सामने आया है, यह बहुत दुर्लभ स्थिति है। उन्होंने कहा कि भारत में 17 वर्ष से कम आयु वाले केवल 8 फीसदी बच्चे कोरोना पॉजिटिव हैं। इनमें भी पांच वर्ष से छोटे बच्चों की संख्या काफी कम है।
Overall the figure in India is that below the age of 17 years, only 8% are #COVID19 positive, and below the age of 5 years, that figure would be much less: Balram Bhargava, DG, ICMR https://t.co/Tu8bY3IVZY
क्या है ये बीमारी?
कावासाकी नाम की यह बीमारी एक बेहद ही दुर्लभ बीमारी है। इसमें शरीर पर चकत्ते और सूजन आने लगती है, साथ ही बुखार, सांस लेने में दिक्कतें और पेट से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। यह बीमारी मुख्य रूप से पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है, लेकिन यह बड़ी उम्र के बच्चों (14-16 साल) को भी प्रभावित कर सकती है। इसकी वजह से बच्चों की रक्त कोशिकाएं फूल जाती हैं और उनके पूरे शरीर पर लाल चकत्ते निकल आते हैं। बच्चों को तेज बुखार के साथ ही उनकी आंखें भी लाल हो जाती हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली के कलावती सरन अस्पताल में बच्चों में कावासाकी से जुड़े लक्षण दिखे थे। सभी बच्चे पहले से ही कोरोना वायरस से संक्रमित थे। यहां के शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र कुमार का कहना था कि 'हालांकि बच्चों में कावासाकी जैसे लक्षण देखने को मिले हैं, लेकिन ये साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता कि वो इसी बीमारी से संक्रमित हैं।'
यूरोप में बच्चों में देखे जा चुके हैं इसके लक्षण
यूरोप में कई जगहों पर बच्चों में इस बीमारी के लक्षण देखे जा चुके हैं। मई महीने में ब्रिटेन में करीब 100 बच्चों के इससे संक्रमित होने की बात सामने आई थी। हालांकि इस बीमारी से पीड़ित ज्यादातर बच्चे ठीक हो गए थे और उन्हें घर भेज दिया गया था, लेकिन यह बीमारी कुछ बच्चों के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकती है और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराना भी पड़ सकता है।