भारत की एकमात्र विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य एक मई से फ्रांसीसी नौसेना के साथ युद्धाभ्यास करेगी। जिसमें इस पोत की युद्धक क्षमताओं को परखा जाएगा। इस युद्धाभ्यास को वरुणा नाम दिया गया है। जानिए पानी में दुश्मनों का काल इस युद्धपोत के बारे में ये खास बातें-
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INS Vikramaditya
- फोटो : PTI
बीते शुक्रवार को इस विशालकाय पोत में आग लग गई थी। जिसे बुझाने के दौरान धुएं के कारण अचेत हुए नौसेना अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर डीएस चौहान शहीद हो गए। आग शुक्रवार सुबह उस समय लगी, जब पोत कर्नाटक के कारवार बंदरगाह पहुंच रहा था।
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इससे पहले भी विक्रमादित्य दुर्घटना का शिकार हो चुका है। 10 जून 2016 को जहरीली गैस रिसने से 2 लोगों की मौत हो गई। इनमें एक नौसैनिक और दूसरा आम नागरिक था। हादसे में दो अन्य लोग घायल भी हो गए। देश के सबसे बड़े युद्धपोत का कर्नाटक के करवार नौसैनिक अड्डे पर मरम्मत का काम चल रहा था, तभी यह हादसा हुआ।
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युद्धपोत आईएनएस विक्रमादित्य को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होने से पहले 'बाकू' और 'एडमिरल गोर्शकोव' के नाम से जाना जाता था। जिसका वजन 44570 टन है।
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विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य की ऊंचाई 60 मीटर है। जो 30 नॉट यानी करीब 54 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकता है।