केरल के कोल्लम में स्थित पुत्तिंगल माता मंदिर में शनिवार की रात हुए भीषण हादसे में करीब 110 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 350 से ज्यादा लोग घायल भी हुए। श्रद्धा की आड़ में हुई आतिशबाजी ने कई लोगों की जिंदगियां छीन लीं। ऐसा पहली बार नहीं था, जबकि पूजा स्थलों पर हुए हादसों ने इतनी जानें ली हों। आइए जानते हैं ऐसे हादसों के चलते कब-कब श्रद्धालुओं को गंवानी पड़ी अपनी जान?
रतनगढ़ माता मंदिर में मची थी भगदड़
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मध्य प्रदेश के दतिया में हुई भगदड़ के बाद का दृश्य
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रतनगढ़ माता मंदिर, दतिया, मध्यप्रदेश (13 अक्टूबर 2013)- मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित प्रसिद्ध रतनगढ़ माता मंदिर में 13 अक्टूबर 2013 को नवरात्रि के अवसर पर ही भगदड़ मच गई थी। भीड़ की वजह से एक पुल धराशायी हो जाने के कारण 115 लोगों की मौत हो गई थी और 110 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
सबरीमाला मंदिर में मकर संक्रांति के दिन भगदड़
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सबरीमाला में भगदड़ के बाद का मंजर
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सबरीमाला, केरला (14 जनवरी 2011)- केरल में स्थित प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में मकर संक्रांति के दिन भगदड़ मचने से 106 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस हादसे में 100 से ज्यादा लोग घायल भी हुए थे। यह घटना उस वक्त हुई जब श्रद्धालु वार्षिक उत्सव के अंतिम दिन पूजा के बाद वापस लौट रहे थे।
मुफ्त सामान लेते वक्त हादसा
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कुंडा में मची थी भगदड़
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कृपालु महाराज आश्रम, कुंडा, उत्तर प्रदेश (4 मार्च 2010)- उत्तर प्रदेश के कुंडा में कृपालु महाराज के आश्रम में स्थित राम जानकी मंदिर में 4 मार्च 2010 को भगदड़ मचने की वजह से 63 लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा 74 लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। मंदिर में खाने और पहनने के कपड़े मुफ्त में बांटे जाने की वजह से वहां करीब 10 हजार श्रद्धालु इकट्ठा हुए थे और इसी दौरान यह हादसा हो गया।
करीब 150 लोगों की मौत हो गई
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नैना देवी मंदिर
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नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश (3 अगस्त 2008)- हिमाचल प्रदेश में स्थित प्रसिद्ध नैना देवी मंदिर में 3 अगस्त 2008 को भगदड़ मचने की वजह से करीब 150 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग इतने ही लोग घायल हुए थे। बरसात से बचने के लिए बनाए गए एक शेल्टर के गिरने की वजह से वहां मौजूद लोगों में भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई।