दिल दुखा है लेकिन टूटा तो नहीं है, उम्मीद का दामन छूटा तो नहीं है...
Year Ender 2019: चंद कदम पहले टूटा चांद छूने का सपना, डेढ़ मिनट में टूटे करोड़ों दिल
आखिरी डेढ़ मिनट में इतिहास बनाने से चूका भारत
सात सितंबर 2019 को भारत के चंद्रयान-2 मिशन को उस समय झटका लगा जब 2.1 किलोमीटर पहले रात के लगभग 1:55 बजे इसरो का लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया। 13 मिनट 48 सेकंड तक सब कुछ बिल्कुल इसरो की योजनानुसार चल रहा था लेकिन आखिरी डेढ़ मिनट ने भारत के इस मिशन को इतिहास बनने से रोक दिया।
करोड़ों भारतवासी चांद पर भारत के पहुंचने का इंतजार कर रहे थे लेकिन दुर्भाग्यवश उनके हाथ मायूसी लगी। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बंगलूरू स्थित इसरो सेंटर में मौजूद थे। उन्होंने वैज्ञानिकों को हौसला न खोने की सलाह दी और उनकी पीठ थपथपाई।
पूरे देश ने किया इसरो के जज्बे को सलाम
यह मिशन बेशक सफलता के इतने करीब पहुंचकर चूक गया हो लेकिन पूरे देश ने इसरो के जज्बे को सलाम किया। विक्रम को सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी, मगर उसे हार्ड लैंडिंग का शिकार होना पड़ा।
इसरो को थी दोबारा संपर्क की उम्मीद
हार्ड लैंडिंग पर इसरो के एक वैज्ञानिक ने कहा था कि चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर में लगे कैमरे ने जो तस्वीरें भेजी हैं, उससे यह पता चला है कि विक्रम की हार्ड लैंडिंग हुई थी। इससे विक्रम में कोई टूट-फूट नहीं हुई है। मेरा मानना है कि विक्रम से अब भी संपर्क हो सकता है।
95 फीसदी सफल था चंद्रयान-2
चंद्रयान 2 का विक्रम लैंडर चांद की सतह पर लैंडिंग से चूक गया हो लेकिन इसरो के हौसले बुलंद थे। इसरो प्रमुख के सिवन ने चंद्रयान 2 मिशन को 95 फीसदी सफल बताया था। उन्होंने कहा था कि आखिरी चरण ठीक से पूरा नहीं किया जा सका, उसी चरण में हमने विक्रम से संपर्क खो दिया।