अमेरिका जैसे विकसित देशों की तर्ज पर भारत में भी मुसाफिरों को कैप्सूल सफर का आनंद मिल सकता है और वे पलक झपकते दिल्ली से मुंबई पहुंच सकते हैं। मुंबई आए हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजीज (एचटीटी) के चेयरमैन बिबॉप ग्रेस्टा ने बताया कि हमने पांच राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बातचीत में इसकी पेशकश की है।
अब कैप्सूल से तूफानी सफर के लिए तैयार रहें, पलक झफकते पहुंचेगे दिल्ली से मुंबई
उन्होंने कहा कि हम स्थानीय भागीदारी के लिए एक कॉर्पोरेट घराने और एक शिक्षण संस्थान से भी बात कर रहे हैं। मुख्यमंत्रियों से हमने कहा कि वे हमें जमीन दें तो हम उनके लिए कैप्सूल सफर का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर देंगे।
अब कैप्सूल से तूफानी सफर के लिए तैयार रहें, पलक झफकते पहुंचेगे दिल्ली से मुंबई
हमारे पास स्थानीय भागीदार भी हैं और अब हम 10 करोड़ जुटाने जा रहे हैं। साथ ही विदेशों से भी निवेश कराने जा रहे हैं। यह धन विशेष रूप से भारत में परिवहन का पांचवां सबसे तेज साधन कैप्सूल वाहन चलाने के लिए जुटाया जाएगा। इसकी रफ्तार एक हजार किलोमीटर प्रति घंटे होगी।
अब कैप्सूल से तूफानी सफर के लिए तैयार रहें, पलक झफकते पहुंचेगे दिल्ली से मुंबई
ग्रेस्टा ने कहा कि परिवहन के इस पांचवें साधन के लिए भूमि अधिग्रहण और अन्य जरूरी अनुमति मिल जाए तो एचटीटी 36 से 38 महीने में ही भारत में इसका इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लेगी। इस साधन के जरिये सामान और मुसाफिरों को एक कैप्सूलनुमा वाहन से जमीन के ऊपर विशेष तौर पर बनाए गए वैक्यूल टनेल के जरिये गंतव्य तक पहुंचाया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सबसे सस्ता ईंधन अक्षय ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है।
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एचटीटी लंबे समय से भारतीय अधिकारियों के संपर्क में है और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से कंपनी के अमेरिकी कार्यालय में बातचीत भी हो चुकी है। ग्रेस्टा ने बताया कि उनकी कंपनी अब तक इस परियोजना पर 3.20 करोड़ खर्च कर चुकी है और यह यूएई, स्लोवाकिया तथा अमेरिका में विभिन्न चरणों में इसकी शुरुआत करने की तैयारी में है। भारत में यदि मंजूरी मिल जाए तो यह भी कैप्सूल चलाने वाले उन चंद देशों में शुमार हो जाएगा।