एफएसएसएआई ने प्लास्टिक या कृत्रिम अंडों को लेकर आम जनता के बीच फैल रहे भ्रम को लेकर एडवाइजरी जारी की हैं। एफएसएसएआई ने जारी अपनी गाइडलाइंस में बताया है कि आमजन के बीच नकली या प्लास्टिक के अंडो को लेकर तमाम तरह के भ्रम फैलाए जा रहे हैं, जो पूरी तरह से बेबूनियाद हैं। प्राधिकरण ने व्यापारियों से भी कहा है कि वे भरोसेमंड विक्रेताओं से ही अंडे खरीदें। ऐसे करें प्लास्टिक या नकली अंडों की पहचान...
अंडों की गुणवत्ता पर चिंतित एफएसएसएआई
भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने अंडों को लेकर जनता के बीच फैल रहे भ्रम को खत्म करने को लेकर गाइडलाइंस जारी की है। एफएसएसएआई के मुताबिक पिछले कुछ महीनों से अंडों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर ग्राहकों और व्यापारियों में तमाम सवाल पैदा हो रहे हैं। साथ ही कई बार ग्राहक भी नकली या प्लास्टिक के अंडों को लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं।
कृत्रिम या नकली अंडे बनाना संभव नहीं
एफएसएसएआई ने साफ किया है कि प्लास्टिक से अंडों के निर्मित होने की खबरें बिल्कुल बेबुनियाद हैं। एफएसएसएआई ने कहा है कि कृत्रिम या नकली अंडे बनाना संभव ही नहीं है और यह केवल एक भ्रम है। अभी तक ऐसी किसी तकनीक का ईजाद नहीं हो सका है, जो असली अंडों से मिलते जुलते प्लास्टिक या नकली अंडे बना सके।
नकली अंडे की कीमत 5 हजार रुपए !
एफएसएसएआई का कहना है कि एक अंडे की खुदरा कीमत 5 रुपए है। जबकि 100 पीस की थ्रीडी प्रिंटिंग कीमत पांच हजार रुपए है। अगर इस कीमत को ध्यान में रखें तो एक अंडे की कीमत 5 हजार रुपए होगी। अगर सामग्री और मजदूरी की कीमत भी जोड़ लें, तो इसकी लागत और बढ़ जाएगी। इसलिए 4-5 रुपए कीमत वाले प्राकृतिक अंडे का कृत्रिम उत्पादन संभव ही नहीं है।
ठीक से करें स्टोर, नहीं तो बन जाएंगे प्लास्टिक जैसे
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फ्रिज में अंडे रखना खतरनाक
गाइलाइंस में बताया गया है कि अंडों के भंडारण का तरीका उनकी गुणवत्ता और रंग रूप को प्रभावित करता है। उच्च गुणवत्ता के लिए अंडों को रेफ्रिजरेटर में रखा जाए और दो से तीन दिन के भीतर ही उपयोग कर लिया जाए। अंडों को 4-5 दिन रेफ्रिजरेटर में रखने की बजाय केवल एक दिन के लिए भी अगर रुम टेंपरेचर पर रख दिया जाए तो उनकी गुणवत्ता पर विपरित प्रभाव पड़ता है। अगर अंडों को ठीक से स्टोरेज नहीं किया गया है, तो वे प्लास्टिक जैसे बन जाएंगे।