भाजपा ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने से इनकार कर दिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि पार्टी महाराष्ट्र में सरकार नहीं बनाएगी। शिवसेना पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि शिवसेना ने जनादेश का अपमान किया है।
वहीं, राज्यपाल ने शिवसेना से सरकार बनाने के बारे में पूछा है। शिवसेना में भी सरकार बनाने को लेकर उत्साह नजर आ रहा है। जो शिवसेना आज भाजपा को आंख दिखा रही है क्या आप उसके इतिहास के बारे में जानते हैं?
बाला साहेब ठाकरे ने महाराष्ट्र के स्थानीय लोगों के अधिकारों के संघर्ष के लिए 19 जून 1966 को शिवसेना की नींव रखी थी। ठाकरे मूल रूप से कार्टूनिस्ट थे और राजनीतिक विषयों पर तीखे कटाक्ष करते थे। वैसे तो शिवसेना कई राज्यों में मौजूद है लेकिन इसका राजनीतिक प्रभाव महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा है।
शिवसेना के गठन के समय बाला साहेब ठाकरे ने नारा दिया था, 'अंशी टके समाजकरण, वीस टके राजकरण' (80 प्रतिशत समाज और 20 फीसदी राजनीति)। लेकिन भूमिपुत्र का मुद्दा लंबे समय तक नहीं चल सका। इसपर समर्थन कम होने के कारण शिवसेना ने हिन्दुत्व के मुद्दे को अपना लिया, जिसपर वह अब तक कायम है।
1970 के शुरुआती दिनों में पार्टी को काफी लोकप्रियता मिली। इस दौरान दूसरे राज्यों विशेष रूप से दक्षिण भारतीय लोगों पर महाराष्ट्र में काफी हमले हुए। 1970 के बाद शिवसेना का भूमिपुत्र का दांव कमजोर होने लगा। इसपर पार्टी ने हिंदुत्व के मुद्दे पर आगे बढ़ना शुरू किया।
शिवसेना ने पहली बार 1971 में लोकसभा चुनाव में लड़ा था लेकिन पार्टी एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं हो सकी। 1989 के लोकसभा चुनाव में पहली बार शिवसेना का सांसद चुना गया। शिवसेना ने पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 1990 में लड़ा जिसमें उसके 52 विधायकों ने जीत हासिल की।