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चार पाकिस्तानी जेट्स से अकेले भिड़े: गोलियां खत्म फिर भी नहीं हटे, अल्फ्रेड कुक का आखिरी संदेश

Sun, 20 Sep 2026 04:37 AM IST
राकेश कुमार एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Sun, 20 Sep 2026 04:37 AM IST
सार

1965 की जंग में भारतीय वायुसेना के फ्लाइट लेफ्टिनेंट अल्फ्रेड टायरोन कुक ने चार पाकिस्तानी जेट्स का अकेले सामना किया था। हवाई लड़ाई के दौरान उनके विमान की गोलियां खत्म हो गईं, फिर भी उन्होंने चौथे विमान का पीछा जारी रखा और उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। वीर चक्र से सम्मानित कुक का शुक्रवार रात दिल्ली में निधन हो गया। उनका आखिरी इंटरव्यू तीन दिन पहले हुआ था।
 

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Alfred Cook Faced Four Pakistani Sabre Jets Alone During 1965 War
सूर्यकिरण एयरोबैटिक टीम, भारतीय वायुसेना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय वायुसेना के फ्लाइट लेफ्टिनेंट (सेवानिवृत्त) अल्फ्रेड टायरोन कुक 1965 की जंग में अमर नायक बनकर उभरे। उन्होंने पाकिस्तानी सेना के चार विमानों को अकेले ही मार भगाया था। वो भी तब जब उनके पास गोला-बारूद भी खत्म हो चुका था। 
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वर्ष 1968 में भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्ति के बाद वह ऑस्ट्रेलिया जाकर बस गए थे। लेकिन अपनी स्क्वाड्रन और भारत के प्रति उनका लगाव बरकरार रहा। वह चाहते थे कि मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार भारत में हो और उनकी अस्थियां यहीं पर पवित्र नदियों में विसर्जित की जाएं। शायद नियति भी यही चाहती थी। उन्होंने शुक्रवार देर रात को दिल्ली में अंतिम सांस ली। उन्होंने तीन दिन पहले ही एनडीटीवी के एक कार्यक्रम में इंटरव्यू दिया था, जो अब उनका अंतिम इंटरव्यू बन गया है। उन्होंने इसमें 1965 की उस ऐतिहासिक हवाई जंग की यादें ताजा कीं और साथ ही युवा पीढ़ी को देशभक्ति का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा, युद्ध या संकट के समय सिर्फ आधुनिक विमान काम नहीं आते, बल्कि पायलट का हौसला, गहन प्रशिक्षण और अपनी मशीन पर अटूट विश्वास ही जीत दिलाता है। 
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भारत में अंतिम सांस लेने की इच्छा पूरी
वह भारतीय वायु सेना की 14 स्क्वाड्रन (द बुल्स) के 75वें स्थापना वर्ष समारोह में शामिल होने के लिए हाल ही में भारत आए थे। यही दिल्ली में रुकने के दौरान उनकी सेहत बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें सैन्य अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यहीं पर उनका निधन हो गया और शनिवार को उनका अंतिम किया गया।
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7 सितंबर 1965 का वो दिन...हौसले की जीत
भारत-पाकिस्तान के बीच 1965 की जंग छिड़ी हुई थी। 7 सितंबर को पाकिस्तान वायु सेना के सेबर जेट्स ने पश्चिम बंगाल के कलाईकुंडा एयरबेस पर अचानक हमला किया था। उस समय हॉकर हंटर विमान से कॉम्बैट एयर पेट्रोलिंग कर रहे अल्फ्रेड कुक का सामना सीधे चार पाकिस्तानी सेबर जेट्स से हुआ। बिना डरे उन्होंने अकेले ही दुश्मन के विमानों पर हमला बोल दिया। कुक ने गजब के हवाई कौशल का प्रदर्शन करते हुए एक सेबर जेट को हवा में ही ध्वस्त कर दिया और दो अन्य विमानों को भारी नुकसान पहुंचाया।

दुश्मन को मैदान छोड़ने पर कर दिया मजबूर
जबर्दस्त डॉगफाइट के दौरान जब उनके विमान की सभी गोलियां खत्म हो गईं, तब भी उन्होंने निडरता का परिचय दिया। उन्होंने पीछे हटने के बजाय चौथे सेबर जेट का आक्रामक पीछा जारी रखा। उनके इस आक्रामक रुख से पाकिस्तानी पायलट इतना भयभीत हो गया कि वह हमला छोड़कर सीमा पार भाग निकला। कुक के इस अदम्य साहस को आईआईटी खड़कपुर के छात्रों ने अपने हॉस्टल की छतों से लाइव देखा था। इस अद्वितीय वीरता के लिए उन्हें भारत सरकार ने वीर चक्र से सम्मानित था।


अल्फ्रेड टायरोन कुक कहते हैं कि तिरंगे का सम्मान सर्वोपरि। एक सैनिक के दिल में देश और अपनी स्क्वाड्रन के प्रति निष्ठा हमेशा सबसे ऊपर होनी चाहिए। अल्फ्रेड कुक का जन्म लखनऊ में हुआ था। शुरुआती पढ़ाई-लिखाई और परवरिश लखनऊ के प्रतिष्ठित ला मार्टिनियर कॉलेज में हुई थी। उनके माता-पिता एंग्लो-इंडियन समुदाय से थे।
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