दिशा सालियान: वकील का दावा- गुनहगार को फांसी के फंदे तक पहुंचाने के पर्याप्त सबूत; आदित्य ठाकरे पर क्या बोले?
सीबीआई दिशा सालियान की मौत मामले में जांच कर रही है। जिन 17 लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें कई हाईप्रोफाइल हस्तियां हैं। दिशा के वकील का दावा है कि गुनहगार को फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए उनके पास पर्याप्त सबूत हैं। पेश है दिशा मामले में वकील नीलेश ओझा से सुरेन्द्र मिश्र की विशेष बातचीत।
विस्तार
दिशा सालियान मौत मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई की ओर से एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस मामले में वरिष्ठ वकील नीलेश ओझा की ओर से हाईकोर्ट में दी गई दलीलें काफी महत्वपूर्ण रही हैं। याचिकाकर्ता पक्ष के वकील नीलेश ने कई गंभीर दावे किए हैं। उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे, पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख, तत्कालीन मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह, अभिनेता डिनो मारिया और सूरज पंचोली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि दिशा की सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या की गई और आत्महत्या का रूप देने के लिए पुलिस मशीनरी का दुरुपयोग किया गया। पढ़िए अहम सवालों के जवाब
सवाल : छह साल बाद यह मामला फिर खुला है। आपको क्या लगता है, जांच में क्या सामने आएगा?
जवाब: इस मामले में अब जांच का रास्ता खुल गया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज हुई है। हमारा आरोप है कि दिशा की हत्या को आत्महत्या का रूप देने के लिए पुलिस मशीनरी का दुरुपयोग किया गया और रिकॉर्ड में हेरफेर हुआ। अब सीबीआई स्वतंत्र रूप से जांच करेगी तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
सवाल : आपके मुताबिक सीबीआई के सामने सबसे महत्वपूर्ण तीन साक्ष्य कौन से हैं?
जवाब: पहला (आई विटनेस) प्रत्यक्षदर्शी, दूसरा आरोपियों के मोबाइल फोन की टावर लोकेशन और तीसरा मूल सीसीटीवी फुटेज। हमारे पास इनसे संबंधित सामग्री है, जिसे हम सीबीआई को उपलब्ध करा रहे हैं। मेरा दावा है कि ये साक्ष्य मामले की दिशा बदल सकते है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर हम कह सकते हैं कि एक आरोपी को फांसी के फंदे पर चढ़ाने के लिए मेरे पास पर्याप्त सबूत है। अब यह सीबीआई का काम है कि वह इन साक्ष्यों की फोरेंसिक और कानूनी परीक्षण करे और जिसकी भूमिका सामने आए, उसके खिलाफ कार्रवाई करे।
सवाल : सीसीटीवी फुटेज अधूरा है। इसको लेकर आपका क्या दावा है?
जवाब: उस दिन की सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ या उसे हटाए जाने की बात जांच में सामने आई है। इस संबंध में फोरेंसिक रिपोर्ट और अदालत के रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हैं। अब जांच एजेंसी को यह पता लगाना होगा कि फुटेज किस परिस्थिति में गायब हुई, किसके निर्देश पर हुई और इसका लाभ किसे मिल सकता था।
सवाल : आप आदित्य ठाकरे समेत कुछ लोगों को गिरफ्तार कर जांच की मांग कर रहे हैं? इसका आधार क्या है?
जवाब: हमारा कहना है कि जिन लोगों के खिलाफ प्रथमदृष्टया गंभीर संदेह या साक्ष्य हैं, उनसे कस्टोडियल पूछताछ की जरूरत है। हमने अदालत के सामने भी यह पक्ष रखा है। अंतिम निर्णय जांच एजेंसी को साक्ष्यों के आधार पर लेना है।