अपने लेखन-जीवन के समग्र अवदान के लिए इस वर्ष का अमर उजाला का सर्वोच्च शब्द सम्मान 'आकाशदीप'- हिंदी में प्रख्यात कथाकार व संपादक ज्ञानरंजन और हिंदीतर भाषाओं में मराठी के विख्यात कवि-उपन्यासकार भालचंद्र नेमाडे को दिया जाएगा। गत वर्ष यह सम्मान डॉ. नामवरसिंह को हिंदी के लिए और गिरीश कारनाड (कन्नड़) को हिंदीतर भाषा में अतुलनीय योगदान के लिए दिया गया था।
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अमर उजाला शब्द सम्मान
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भारतीय भाषाओं के सामूहिक स्वप्न के सम्मान में अमर उजाला फाउंडेशन ने शब्द सम्मान की स्थापना की है। सर्वोच्च आकाशदीप अलंकरण हिंदी और अन्य भारतीय भाषा में एक-एक साहित्य मनीषी को अर्पित किया जाता है। अलंकरण में पांच-पांच लाख रुपये की राशि सम्मिलित है।
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ज्ञानरंजन और भालचंद्र नेमाडे
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अमर उजाला का सर्वोच्च शब्द सम्मान 'आकाशदीप' के लिए घोषित हिंदी में प्रख्यात कथाकार व संपादक ज्ञानरंजन ने कहा कि, 'अमर उजाला के ये सम्मान रचनाधर्मिता के स्वतंत्र मिजाज का अभिनंदन हैं।'
वहीं हिंदीतर भाषाओं में मराठी के विख्यात कवि-उपन्यासकार भालचंद्र नेमाडे का कहना है कि, 'यह मानवीय सभ्यताओं के विचार और भाषिक संस्कृति के मूल्यवान साझे की निरंतरता का सम्मान है।'
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ज्ञान चतुर्वेदी के उपन्यास ‘पागलखाना’ को श्रेष्ठ कृति सम्मान 'छाप' उपन्यास
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वर्ष 2018 की श्रेष्ठ कृतियों के लिए शब्द सम्मानों की घोषणा भी कर दी गई है। 'छाप' श्रेणी में कथा (उपन्यास) वर्ग में ज्ञान चतुर्वेदी के उपन्यास ‘पागलखाना’ को चुना गया है।
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गगन गिल को श्रेष्ठ कृति सम्मान 'छाप' कविता
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कविता वर्ग में गगन गिल के संग्रह ‘मैं जब तक आई बाहर’ को चुना गया है।