कालिंदी का किनारा और सैकड़ों हरे भरे वृक्षों के बीच नदी की रेती पर सुनाई देते होली के गीत। हंसी-ठिठोली, पिचकारियों से छूटती रंग की धार और महिलाओं का परंपरागत गारी (गाली) गायन।
राधाकृष्ण के स्वरूप में कलाकारों ने ब्रजवासियों संग खेली होली
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रमणरेती आश्रम में होली
- फोटो : अमर उजाला
शनिवार को रमणरेती आश्रम में होली महोत्सव कुछ इस प्रकार महसूस किया गया। यहां हजारों भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण और राधाजी के साथ टेसू के फूलों के रंग, अबीर-गुलाल और फूलों से होली खेली।
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रमणरेती आश्रम में होली
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रमणरेती आश्रम में गुरु कार्ष्णि गोपाल जयंती कार्यक्रम मनाया जा रहा है। यहां 85वें वार्षिकोत्सव के अंतर्गत शनिवार को होली महोत्सव का आयोजन किया गया। ब्रज के प्रमुख रासाचार्य स्वामी रामस्वरूप शर्मा के निर्देशन में कलाकारों ने फू लों की होली का प्रदर्शन किया।
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रमणरेती आश्रम में होली
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मोहक राधाकृष्ण, ग्वाल बाल, गोपियां और मनसुखा की होली का भी मंचन किया गया। ‘नैहनी नैहनी बूंदन परै फुहारौ, मारि पिचकारी रंग केसरिया डारौ’ पंक्तियां सुनकर भक्त झूम उठे। इसके अलावा नंदगांव के हुरियारों का बरसाना में होली खेलने जाने वाले दृश्य का भी मंचन किया गया।
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श्रद्धालुओं ने एक दूसरे को गुलाल लगाया और ब्रज रज मस्तक पर लगाकर खुद को धन्य माना। इस दौरान संत अवधेशानंद, स्वामी स्वरूपानंद प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।