ऑल इंडिया पंडित नेहरू सिंगल विकेट टूर्नामेंट खेलने 39 साल पहले छह मार्च 1982 को भारतीय क्रिकेट टीम रेलवे स्टेडियम में उतरी थी। कपिल ने सेमीफाइनल और फाइनल में आतिशी बल्लेबाजी की थी। फाइनल में उन्होंने करीब 30 हजार दर्शकों के बीच कानपुर के विकेटकीपर बल्लेबाज और वर्तमान में आईपीएल के रेफरी सुनील चतुर्वेदी को आसानी से हरा दिया था। कपिल ने इस मैच 6 छक्कों मारकर 63 रन बनाए थे जबकि सुनील ने 5 चौके की मदद से 37 रन बनाए थे। लेकिन दो बार आउट होने से 8 रन घट गया और स्कोर 29 रन पर आ गया।
तस्वीरें: 39 साल पहले गोरखपुर में उतरी थी भारतीय क्रिकेट टीम, कपिल देव ने की थी आतिशी बल्लेबाजी
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गावस्कर को हरा हसन नदीम ने किया था उलटफेर
मैच की आयोजन को लेकर कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। मैच खेलने वाले हसन नदीम (वर्तमान में सीसीएम दफ्तर में ओएस ) बताते हैं कि उनके साथ खेलने वाले रेलवे के कुछ खिलाड़ियों ने तत्कालीन डीएम बीएम बोहरा से मुलाकात की थी और उन से अनुरोध किया था कि कुछ बड़े मैच कराएं ताकि वे अपनी प्रतिभा दिखा सकें।
उनकी बात से तत्कालीन डीएम बहुत खुश हुए और उन्होंने कहा कि तुम तैयारी करो, हम पूरी भारतीय टीम बुला देंगे। यह सुनकर किसी को यकीन नहीं हुआ लेकिन 3 दिन बाद डीएम ने इन खिलाड़ियों को बुलाया और कहा कि छह मार्च 1982 को सैयद मोदी रेलवे स्टेडियम में तुम लोगों का मैच होगा। हमारी बात भारतीय टीम के कप्तान सुनील गावस्कर से बात हो चुकी है। उनके साथ टीम के और खिलाड़ी भी आएंगे।
हसन के लिए रवि शास्त्री ने सजाई थी फील्डिंग
हसन नदीम बताते हैं कि मेरा पहला मैच भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान सैयद किरमानी से पड़ा था लेकिन सैयद किरमानी के पिताजी का निधन हो गया इसलिए वह नहीं आ सके। इसके बाद मेरा मैच भारतीय टीम में वैकल्पिक रूप से विकेटकीपर जुल्फिकार से पड़ा। मैंने पहले मैच में जुल्फिकार को हरा दिया। फिर मुझसे डीएम ने कहा कि अब किससे खेलोगे। मैंने कहा सुनील गावस्कर या कपिल देव से। तब उन्होंने सुनील गावस्कर से मेरा मैच कराया।
मैंने पहले बल्लेबाजी की 3 ओवर का मैच था। एक बार आउट होने पर 4 रन की कटौती थी। मैंने कुल 3 ओवर में 28 रन बनाए। 2 बार आउट हुआ तो 8 रन मेरे काट लिए गए। इस तरह गावस्कर को 20 रन का लक्ष्य मिला। मेरा सौभाग्य था कि मैंने पहले ही ओवर में गावस्कर को आउट कर दिया। मेरे लिए फील्डिंग रवि शास्त्री ने सजाई थी। मैं लेफ्ट आर्म स्पिनर था और रवि शास्त्री की भी खूबी यही थी। लिहाजा वह जानते थे कि मेरे फील्डिंग कैसे सजानी है। गावस्कर को मैंने 3 ओवर में 3 बार आउट किया। उनका अंक घटकर 12 रह गया और मुझे उनसे मैं जीतने का गौरव हासिल हुआ।
जीत के बाद उन्होंने मुझको बुलाया। अपना बल्ला मुझे उन्होंने इनाम में दे दिया। मेरे जीवन में इससे बड़ी सौगात और कुछ नहीं हो सकती थी। वह बल्ला आज भी मेरे ड्राइंग रूम है। हसन बताते हैं को वे उस समय गोरखपुर विश्वविद्यालय टीम के कप्तान थे और एमए प्रथम वर्ष के छात्र थे।
प्रेम शाही और परवेज ने भी दी कड़ी टक्कर
परवेज हसन और प्रेम शाही पहला मैच में हार गए थे लेकिन उन्होंने ने भी कड़ी टक्कर दी थी। प्रेम शाही का मुकाबला करसन घावरी से और परवेज ने मिलिंद से खेला था।