दुनिया में सबके लिए जगह है। चाहे वो उच्च कुल में पैदा हुआ हो या फिर फिर निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में। पंजाबी पृष्टभूमि पर आधारित स्टार प्लस के नए शो 'तेरी मेरी डोरियां' की कहानी ऐसे ही दो परिवार की है जो अलग अलग पृष्ठभूमि से आते हैं। बराड़ फैमिली पैसे वाले लोग हैं और मूंगा परिवार के लोग इतने अमीर नहीं हैं। लेकिन उनके पास हुनर की दौलत है। दौलत और हुनर के बीच इस शो में टकराव दिखाया गया है। आज मुंबई के फिल्म सिटी स्टूडियो में बने इस शो के सेट पर ट्रेलर लांच हुआ,जहां पर शो के सभी कलाकार मौजूद रहें।
New TV Show: 'तेरी मेरी डोरियां' दौलत और हुनर के बीच टकराव, पिता के अधूरे सपने को पूरा करने की कोशिश
हुनर वाले लोगों का कहना है कि दौलत मंद लोगों को दौलत विरासत में मिली है उससे ज्यादा हम अपने हुनर से कमा सकते हैं। लोगों को विरासत में मिली दौलत का घमंड हो जाता है। लेकिन विरासत में मिली हुई चीज एक इत्तेफाक है। यह इत्तेफाक है कि आप किसके घर में जन्म लेते हो,लेकिन ऐसे घर में जन्म लेने के बाद खुद के बलबूते पर क्या हासिल करते हो? वो सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। बराड़ फैमिली का मानना है कि दुनिया में सिर्फ एक ही भाषा चलती है और वह पैसे की भाषा। पैसा उस परिवार की रीड की हड्डी है। लेकिन यह भी बात सही है कि पैसा से शायद सब कुछ खरीद सकता है,लेकिन पैसे से खुशी नहीं खरीदी जा सकती है। जरूरी नहीं कि हर अमीर परिवार खुश परिवार हो।
'तेरी मेरी डोरियां' में लीड भूमिका निभा रहे विजयेंद्र कुमेरिया कहते है, 'पहली बार एक सिख किरदार निभा रहा हूं। इस किरदार के रूप खुद को ढालने के लिए मैंने काफी परिवर्तन किया है। मैं अंगद सिंह बराड़ की भूमिका निभा रहा हूं जो परिवार का सबसे बड़ा बेटा और एक बेहतरीन बिजनेसमैन हैं। उसमें बहुत ही छोटी उम्र से चीजों को पैसे और समय से तौलने की आदत विकसित हो गई थी और उसके अनुसार बाहरी दुनिया में ये दो चीजें सबसे अहम हैं और फिर पैसे की भाषा हर कोई समझता है। जब उसके अपने परिवार की बात आती है तो वह उन्हें सबसे ज्यादा प्यार करता है और उन्हें खुश रखने के लिए कुछ भी कर सकता है। यह फैमिली स्पेस है जहां वह बैक सीट पर आ जाता है और उसका दिल दिमाग पर हावी हो जाता है। एक परफेक्शनिस्ट होने के नाते उसे अब तक अपना परफेक्ट मैच नहीं मिला है।'
'तेरी मेरी डोरियां' में साहिबा की भूमिका निभा रही हिमांशी पाराशर शूटिंग के दौरान का अनुभव साझा करते हुए कहती हैं, 'जब हम लुधियाना में इस शो के एक सीक्वेंस की शूटिंग कर रहे थे, तब मुझे मिट्टी के बर्तनों के टूल्स से मिट्टी के बर्तन बनाने को मौका मिला। वे काफी बड़े और बहुत भारी थे। मैंने सचमुच चरखा चलाना सीखा, इस दौरान मुझे कई बार चोट भी लगी क्योंकि वह सीमेंट से बना था और बहुत भारी भी था। जिसकी वजह से मेरे पीठ में दर्द होने लगा था। लेकिन वह सीन शूट करने में मुझे बहुत आनंद आया और वह सीन मेरे सबसे यादगार सीन में से एक है।'
'तेरी मेरी डोरियां' का निर्देशन जयदीप सेन कर रहे हैं। जयदीप सेन साल 2008 में राकेश रोशन की फिल्म 'क्रेजी 4' का निर्देशन कर कर चुके हैं। जयदीप सेन कहते हैं, 'राकेश रोशन के साथ मैं 'कोई मिल गया' और 'कृष 3' में एसोसिएट डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुका हूं। अब तक मैं 'गुम है किसी के प्यार में', 'मान रहे तेरा पिता', 'भास्कर भारती' जैसे शो का निर्देशन कर चुका हूं। लेकिन 'तेरी मेरी डोरियां' मेरे दिल के बहुत करीब है इसलिए इस शो को करके अंदर से खुशी मिल रही है। चूंकि मैं फिल्मों की पृष्ठभूमि से आया हूं, इसलिए इस शो का निर्देशन फिल्म जैसा ही कर रहा हूं।'